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Home बिहार गोपालगंज gopalganj news : एनएच 727 बी पर यूपी में रफ्तार भर रहे वाहन, बिहार में भूमि अधिग्रहण का काम ही अधूरा

gopalganj news : एनएच 727 बी पर यूपी में रफ्तार भर रहे वाहन, बिहार में भूमि अधिग्रहण का काम ही अधूरा

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gopalganj news : एनएच 727 बी पर यूपी में रफ्तार भर रहे वाहन, बिहार में भूमि अधिग्रहण का काम ही अधूरा
सांकेतिक तस्वीर

gopalganj news : भोरे. उत्तर प्रदेश और बिहार को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना नेशनल हाइवे 727बी को लेकर एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गयी है. उत्तर प्रदेश की सीमा में यह सड़क बनकर तैयार है और गाड़ियां सरपट दौड़ रही हैं. वहीं, बिहार में प्रवेश करते ही विकास की रफ्तार ””पुराने ढर्रे”” पर लौट आती है.

आश्चर्य की बात यह है कि बिहार के हिस्से में अभी जमीन अधिग्रहण तक पूरा नहीं हुआ है, लेकिन कागजों और सड़कों के किनारे एनएचएआइ के ””माइलस्टोन”” (दूरी बताने वाले पत्थर) पहले ही गाड़ दिये गये हैं. उत्तर प्रदेश में इस हाइवे का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है. देवरिया जिले के भाटपार रानी से लेकर भिंगारी तक सड़क का शानदार निर्माण हो चुका है. बिहार की सीमा (भोरे प्रखंड) तक आते-आते इसे बाइपास और फ्लाइओवर से लैस कर दिया गया है. दूसरी ओर, कुशीनगर के तमकुही राज से मिश्रौली तक भी सड़क बनकर तैयार है. यूपी की ओर से देखने पर यह हाइवे किसी आधुनिक कॉरिडोर जैसा अहसास कराता है.

बिहार की जमीनी हकीकत व दावों में अंतर

यह हाइवे बिहार के पंचदेवरी, कटेया और भोरे प्रखंडों में प्रवेश करता है, तो तस्वीर पूरी तरह से बदल जाती है. माइलस्टोन का खेल, स्थानीय लोगों का कहना है कि बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने माइलस्टोन लगा दिये हैं, जिससे पहली नजर में लगता है कि निर्माण हो गया है. लेकिन हकीकत यह है कि भोरे-कटेया और पंचदेवरी प्रखंड में सड़क आज भी अपने पुराने और जर्जर हाल में है. सीमावर्ती इलाकों के ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी मायूसी है कि यूपी में विकास द्वार तक पहुंच गया है, लेकिन बिहार की सुस्ती ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया है.

भू-अर्जन की पेच में उलझा पांच गांवों में हाइवे

बिहार में निर्माण कार्य शुरू न होने की मुख्य वजह जमीन अधिग्रहण में देरी है. गोपालगंज जिला भू-अर्जन कार्यालय फिलहाल इन पांच गांवों के किसानों के कागजी फेरबदल में उलझा हुआ है, उसमें भोरे अंचल के मलचौर (थाना नंबर 285) का 01 खेसरा, जिसका नोटिस जारी हो चुका है. वहीं, मिश्रवलिया मौजा (थाना नंबर 283) के 36 खेसरा शामिल है, जिनका नोटिस अंतिम दौर में है. भानपुर मौजा के (थाना 284) का 23 खेसरा में नोटिस प्रक्रियाधीन है. जबकि, सिसई मौजा के (थाना 288) के 46 खेसरा में नोटिस प्रक्रियाधीन है. जबकि, रुद्रपुर मौजा के (थाना 286) 08 खेसरा के लिए नोटिस अंतिम दौर में है. विभाग का दावा है कि किसानों को नोटिस दिया जा चुका है और भू-अर्जन का कार्य अब अंतिम चरण में है. विभाग का मानना है कि जैसे ही जमीन का कब्जा मिलेगा, हाइवे निर्माण में तेजी आयेगी.

बॉर्डर इलाके में यूपी की सड़क को देख होता है अफसोस

पंचदेवरी और भोरे के स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब वे यूपी की सीमा में चकाचक सड़कों को देखते हैं, तो उन्हें अपने क्षेत्र के पिछड़ेपन पर दुख होता है. यूपी में बाइपास और फ्लाइओवर बन गये, हमारे यहां अभी जमीन के पैसे भी नहीं मिले. माइलस्टोन गाड़ देने से हाइवे नहीं बन जाता. बहरहाल, राष्ट्रीय राजमार्ग 727 बी केवल एक सड़क नहीं, बल्कि इस इलाके की लाइफलाइन है. यह यूपी के बड़े शहरों को बिहार के ग्रामीण अंचलों से जोड़ता है. अगर बिहार सरकार और भू-अर्जन विभाग ने तत्परता नहीं दिखायी, तो बिहार के लोग यूपी की सड़कों को बस सीमा पर खड़े होकर निहारते ही रह जायेंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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