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हर तीसरे दिन एक बैंक उपभोक्ता साइबर क्राइम का हो रहा शिकार

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हर तीसरे दिन एक बैंक उपभोक्ता साइबर क्राइम का हो रहा शिकार

गोपालगंज. त्योहारों का सीजन आते ही साइबर अपराधी सक्रिय हो गये हैं. इनकी नजर लोगों के बैंक खातों पर है. साइबर अपराधियों का बैंक खातों से ट्रांजेक्शन करने का ट्रेंड भी बदल गया है. पहले कभी आधार लिंक के बहाने तो कभी एटीएम एक्सपायर होने के बहाने आम लोगों से फोन कर जानकारियां ले रहे थे, इसके बाद उन खातों से पैसे उड़ाते थे. लेकिन, हाल के दिनों में साइबर अपराधियों का न तो कॉल आ रहा है, न किसी से पासवर्ड पूछा जा रहा है, फिर भी अकाउंट से लाखों रुपये ऑनलाइन ट्रांजेक्शन हो जा रहा है. गोपागलंज में ऐसे एक-दो नहीं, बल्कि जनवरी से अब तक 83 मामले सामने आ चुके हैं. एसबीआइ, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक, पीएनबी समेत अन्य बैंकों के ग्राहक साइबर फ्रॉड के शिकार हो रहे हैं. साइबर क्राइम के अधिकतर मामलों में पुलिस भी शिकायत दर्ज करने से कतरा रही है. ये बातें कभी नहीं करें साझा : बैंक की खाता संख्या, एटीएम पिन, वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी), सीवीवी नंबर (एटीएम कार्ड के पीछे के तीन अंक), आधार नंबर की जानकारी कभी भी किसी को नहीं देनी चाहिए. बताया जाता है इंस्ट्राग्राम, व्हाट्सएप, फेसबुक, एक्स पर दी गयी किसी भी प्रकार के लाभ या फायदा पहुंचानेवाली लिंक को डाउनलोड नहीं करें. हैकर्स मोबाइल हैक कर आपका डाटा चुरा सकते हैं. मालूम हो कि इंटरनेट के जरिये किये जानेवाले अपराध को साइबर क्राइम कहा जाता है. फेसबुक पर अश्लील तस्वीर, मैसेज, वीडियो अपलोड करना इसी श्रेणी में आता है. इसके अलावा बैंक की जानकारी से लेकर पैसा निकालना, क्रेडिट कार्ड हैक कर खरीदारी करना, कंप्यूटर हैक करना साइबर क्राइम है. सोशल साइट्स पर चैटिंग करनेवालों की पहचान संभव नहीं है. तकनीक से यह तो पता लगाया जा सकता है कि किस कंप्यूटर या किस नंबर के मोबाइल से ऑनलाइन ठगी की गयी है, लेकिन कौन उपयोग कर रहा था, यह खुलासा करने की तकनीक ही नहीं है. इस संबंध में पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने कहा कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों की तहकीकात चल रही है. साइबर अपराधियों का नेटवर्क बड़ा है. बैंक किसी भी ग्राहक से गोपनीय जानकारी नहीं पूछता है. आम लोगों को भी साइबर क्राइम से बचने के लिए जागरूक होना पड़ेगा. साइबर फ्रॉड से संबंधित सभी मामलों की शिकायत के लिए साइबर थाना खुला है. डीएसपी सह साइबर थानाध्यक्ष को सभी मामलों की जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.

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