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बिहार की सांझी विरासत के तहत एक दूसरे की संस्कृति व भावनाओं का करते हैं सम्मान

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बिहार की सांझी विरासत के तहत एक दूसरे की संस्कृति व भावनाओं का करते हैं सम्मान

गया जी. गया कॉलेज के शिक्षा शास्त्र विभाग में गुरुवार को प्राचार्य प्रो सतीश सिंह चंद्र के दिशा निर्देश पर विद्यार्थी के बीच भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. प्रतियोगिता में बिहार के सांस्कृतिक विरासत विषय पर प्रतिभागियों ने स्पीच दिया. किसी ने बिहार के सांस्कृतिक विरासत का वर्णन किया तो किसी ने बिहार को ऐतिहासिक धरा बताते हुए बिहार के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान की चर्चा की तो किसी ने संस्कृति के अभिन्न पहलू तीज त्योहारों पर प्रकाश डाला. विभाग के अध्यक्ष डॉ धनंजय धीरज ने कहा कि हमें बिहार के ऐतिहासिक सांस्कृतिक धार्मिक व सामाजिक विरासत पर गर्व है. बिहार की ऐतिहासिक भूमि पर भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई साथ साथ भगवान महावीर का भी बिहार की धरती से गहरा नाता रहा है. इसी धरती पर मनेर शरीफ सहित सैकड़ों दरगाह हैं जहां से हजारों देशवासियों की आस्था जुडी हुई है. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में बाबू वीर कुंवर सिंह की चर्चा करते हुए कहा कि देश के आजादी का संघर्ष में भी बिहार वासियों की ऐतिहासिक भूमिका रही है. तीज त्योहार पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार ऐसा प्रदेश है जो सबको इस बात का संदेश देता है कि उगते हुए सूर्य की पूजा के साथ-साथ हम डूबते हुए सूर्य की भी उपासना करते हैं. विभिन्न धर्म और संस्कृति के उपासक बिहार की पावन धरती पर रहते हैंं. साथ साथ सांझी विरासत के तहत एक दूसरे के संस्कृति और एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान भी करते हैं. बिहार की समृद्ध संस्कृति देश दुनिया को मूल्यवान संदेश देने का कार्य किया है.

भाषण प्रतियोगिता में प्रत्यूष आकाश रहे अव्वल

भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर बीएड प्रथम वर्ष के प्रत्यूष प्रकाश रहे. वहीं द्वितीय स्थान पर प्रथम वर्ष के ही विकास कुमार व तृतीय स्थान पर द्वितीय वर्ष की सत्या कुमारी रही. कार्यक्रम समन्वयक मो सदरे आलम ने सभी का स्वागत किया. शिक्षा शास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापिका निखत परवीन, अमरेंद्र कुमार व अजय शर्मा ने निर्णायक मंडल की भूमिका निभायी. अव्वल प्रतिभागियों को शिक्षा शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ धनंजय धीरज ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया.

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