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कार्टोग्राफी की मदद से पाल्म्टॉप पर उपलब्ध होगी मेडिकल हिस्ट्री

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कार्टोग्राफी की मदद से पाल्म्टॉप पर उपलब्ध होगी मेडिकल हिस्ट्री

डिजिटल कार्टोग्राफी मैपिंग में नयी क्रांति : डॉ सुनील कुमार बरनवाल

सीयूएसबी में बेहतर कल के लिए कार्टोग्राफी में तरक्की विषय पर संगोष्ठी का आयोजन

वरीय संवाददाता, बोधगया.

हालिया दिनों में डिजिटल कार्टोग्राफी ने मैपिंग के क्षेत्र में एक नयी क्रांति ला दी है. कार्टोग्राफी में इस टेक्नोलॉजी की मदद से आप अपनी जरूरत के हिसाब से मैप कर सकते हैं. कभी आप छोटी-छोटी कुदरती चीज को मैप करते हैं, कभी आप आबादी को मैप करते हैं, कभी आप सोशल इंडेक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और भी बहुत कुछ मैप करते हैं. उक्त बातें चीफ एग्जिक्यूटिव अफसर (सीइओ), नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए), मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर भारत सरकार के डॉ सुनील कुमार बरनवाल ने सीयूएसबी में आयोजित 45वें आइएनसीए इंटरनेशनल कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में कहीं. नेशनल एटलस एंड थीमेटिक मैपिंग ऑर्गेनाइजेशन (एनएटीएमओ) व सीयूएसबी के संयुक्त तत्वाधान में बेहतर कल के लिए कार्टोग्राफी में तरक्की विषय पर आयोजित संगोष्ठी में डॉ बरनवाल ने कहा कि डिजिटल कार्टोग्राफी सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना में हेल्थ सेक्टर में बड़ी भूमिका निभा सकती है. उन्होंने कहा कि कार्टोग्राफी की मदद से किसी बीमारी के लिए आपकी बहुत सारी मेडिकल हिस्ट्री आपके पाल्म्टॉप पर उपलब्ध होगी. सीयूएसबी के कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह ने कांग्रेस की थीम के बारे में विस्तार से बताया. कहा कि इसे आयोजित करने का सबसे खास कारण 2047 तक विकसित भारत का विजन है. 2047 के आखिर तक भारत को 30 ट्रिलियन की इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य तब तक हासिल नहीं किया जा सकता, जब तक देश के जिम्मेदार नागरिक, शिक्षाविद्, प्लानर और पॉलिसी मेकर, कार्टोग्राफर के साथ मिलकर एक विकसित व खुशहाल भारत देखने के सपने को पूरा करने में अपना योगदान नहीं देते.

कार्टोग्राफी का मुख्य उद्देश्य धरती की सतह को समझना है : कुलसचिव

कुलसचिव प्रो नरेंद्र कुमार राणा ने अपने स्वागत भाषण में कार्टोग्राफी को बनाने का साइंस और आर्ट बताया, जिसमें डेटा इकट्ठा करने, प्रोसेस करने और ज्योग्राफिकल जानकारी को कम्युनिकेट करने का प्रोसेस शामिल है. उन्होंने कहा कि कार्टोग्राफी का मुख्य उद्देश्य धरती की सतह को समझना है. एनएटीएमओ के डायरेक्टर और आइएनसीए के प्रेसिडेंट डॉ बिनोद कुमार सिंह ने कहा कि ज्योग्राफी और कुछ नहीं, बल्कि कार्टोग्राफी का साइंस है. कार्टोग्राफी की टेक्निक, टूल्स और टेक्नोलॉजी के तेजी से बदलते व विकसित होते ट्रेंड्स हैं. नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) के निदेशक डॉ प्रकाश चौहान ने कहा कि हमारे मैप आधारभूत तरीके से डायनामिक मैप है और ये थ्री-डी भी नहीं है. लेकिन, वर्तमान परिदृश्य में जिस तरह से हम ऑनलाइन डिलीवरी के लिए डिजिटल मैप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसमें फोर-डी मैप्स की जरूरत है. वाइस एडमिरल लोचन सिंह पठानिया, चीफ हाइड्रोग्राफर भारत सरकार ने कहा कि 11098 किलोमीटर से ज्यादा लंबे कोस्टलाइन के साथ भारत ज्योग्राफिकली एक आइलैंड देश है, क्योंकि यह समुद्र के रास्ते ही बाकी दुनिया से जुड़ा हुआ है. दो मिलियन स्क्वायर किलोमीटर से ज्यादा के इकोनॉमिक जोन के साथ हमारी इकोनॉमी में मैरीटाइम स्टडीज व नाइट टाइम कार्टोग्राफी का बहुत महत्व है.

विजेता प्रतिभागी सम्मानित

पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यक्रम का आयोजन डॉ मंजीत सिंह की देखरेख में हुआ, जबकि मंच संचालन रिसर्च स्कॉलर पूर्णिमा ने किया. उद्घाटन सत्र ज्योग्राफी डिपार्टमेंट की अध्यक्ष प्रो किरण कुमारी के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ समाप्त हुआ. मौके पर स्कूल लेवल पर आयोजित नेशनल कार्टोग्राफी क्विज के विजेताओं को भी कुलपति प्रो केएन सिंह ने पुरस्कार व प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया. आगे तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने संगोष्ठी के विषय पर अपने विचार साझा किये तथा अकादमिक जगत से जुड़े लोगों, प्राध्यापकों व शोधार्थियों ने थीम से जुड़े अलग-अलग विषयों पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किये.

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