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Home बिहार गया वन नेशन-वन सब्सक्रिप्शन डिजिटल लाइब्रेरी शोध क्षेत्र में नयी क्रांति : कुलपति

वन नेशन-वन सब्सक्रिप्शन डिजिटल लाइब्रेरी शोध क्षेत्र में नयी क्रांति : कुलपति

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वन नेशन-वन सब्सक्रिप्शन डिजिटल लाइब्रेरी शोध क्षेत्र में नयी क्रांति :  कुलपति

कही भी बैठे-बैठे एक क्लिक पर शोध से जुड़े विषयों की प्राप्त करें जानकारी

फोटो- गया बोधगया 210- कार्यक्रम में मौजूद कुलपति व अन्य

फोटो- गया बोधगया 211- कार्यक्रम का उद्घाटन करते कुलपति व अतिथि

वरीय संवाददाता, गया जी

सूचना प्रौद्योगिकी (आइटी) के इस युग में आज कोई भी सूचना महज आपसे एक क्लिक की दूरी पर है और आप घर बैठे दुनिया के किसी भी विषय पर जानकारी हासिल कर सकते हैं, जहां पहले शोध के लिए रिफरेंस सामग्री तथा साहित्य के लिए देश की बड़ी लाइब्रेरी का भ्रमण करता था. आज कहीं जाने की आवश्यकता नहीं है. वर्तमान समय के शोधार्थी भाग्यशाली हैं कि उन्हें कही भी बैठे-बैठे एक क्लिक पर शोध से जुड़े किसी भी विषय संबंधित आवश्यक जानकारी मिल जाती है. भारत सरकार द्वारा प्रायोजित जनवरी 2025 में 6000 करोड़ के बजट वाले वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन (ओएनओएस) ने शोध के क्षेत्र में नयी क्रांति लायी है, जिसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे और यह विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में सहायक होगा. यह बातें सीयूएसबी के कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह ने यूजीसी द्वारा प्रायोजित आइआरआइएनएस एंड इनफ्लिबनेट सर्विसेज फॉर स्कॉलरली कम्युनिटीज विषय पर आधारित उपयोगकर्ता जागरूकता कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कही. सीयूएसबी के राजर्षि जनक सेंट्रल लाइब्रेरी एवं इनफ्लिबनेट सेंटर, गांधीनगर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में कुलपति प्रो केएन सिंह ने कहा कि ओएनओएस भारत में एक वन-स्टॉप डिजिटल लाइब्रेरी है, जहां विभिन्न शैक्षणिक विषयों में वैश्विक शोध तक संस्थागत पहुंच उपलब्ध है. दुनिया के 30 अग्रणी प्रकाशकों के गुणवत्तापूर्ण जर्नल ऑनलाइन उपलब्ध हैं जिसे ओएनओएस के सब्सक्रिप्शन के माध्यम से एक्सेस (पढ़ा और डाउनलोड) किया जा सकता है. कुलपति प्रो सिंह ने इनफ्लिबनेट के सहयोग से सेंट्रल लाइब्रेरी द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन मंडल विशेषकर पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ प्रमोद कुमार सिंह, डिप्टी लाइब्रेरियन डॉ पंकज माथुर, असिस्टेंट लाइब्रेरियन डॉ मयंक युवराज एवं अन्य पुस्तकालयकर्मियों की सराहना करते हुए बधाई तथा शुभकामनाएं दी. उन्होंने कहा कि सीयूएसबी का ध्यय कैंपस फॉर कम्युनिटी है और मैं आशा करता हूं कि विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी के संसाधनों का लाभ आसपास के गांव व संपूर्ण मगध क्षेत्र को मिलेगा. बिहार का अपना गौरवशाली इतिहास रहा है और कुछ ही दूरी पर वैश्विक धरोहर नालंदा विश्वविद्यालय में विश्व की बड़ी लाइब्रेरी रही है और वर्तमान प्रयासों से भारत पुनः शिक्षा व ज्ञान के क्षेत्र में विश्वगुरु की भूमिका निभायेगा. पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि इससे पहले दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ के पश्चात पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ प्रमोद कुमार सिंह ने स्वागत भाषण किया. विशिष्ठ अतिथि डॉ अभिषेक कुमार, वैज्ञानिक-इ (सीएस), इनफ्लिबनेट केंद्र, गांधीनगर ने ऑनलाइन लर्निंग प्रोग्राम एवं कोर्स मटेरियल के डाउनलोड के संबंध में प्रतिभागियों को अवगत कराया. हितेश कुमार सोलंकी, वैज्ञानिक-सी (सीएस), इनफ्लिबनेट केंद्र ने ओएनओएस के सब्सक्रिप्शन के साथ-साथ भविष्य की योजनाओं को साझा किया. डिप्टी लाइब्रेरियन डॉ पंकज माथुर ने धन्यवाद ज्ञापित किया.

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