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Gaya News : सामुदायिक भागीदारी के बल पर निरंजना नदी का होगा पुनरुद्धार

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Gaya News : सामुदायिक भागीदारी के बल पर निरंजना नदी का होगा पुनरुद्धार

बोधगया. निरंजना नदी के संरक्षण और पुनरुद्धार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार काे आयोजित की गयी. बैठक में कार्यकारी निदेशक (परियोजना) बृजेंद्र स्वरुप, एसएमसीजी, गोकुल फाउंडेशन (एनजीओ) समेत विभिन्न तकनीकी संस्थान शामिल रहे. बैठक में निरंजना नदी के कायाकल्प के लिए परियोजनाओं और रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गयी. इस दौरान महानिदेशक ने नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन को सुनिश्चित करने के लिए विज्ञान, सामुदायिक भागीदारी और टिकाऊ विकास पर आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया. उन्होंने उन चुनौतियों और समाधानों पर भी प्रकाश डाला जो नदी के भविष्य को सुरक्षित करने में सहायक होंगे. बैठक में बताया गया कि निरंजना नदी के पुनर्जीवन के लिए एक बहुआयामी रणनीति तैयार की गयी है. यह रणनीति वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तत्काल समाधान और सामुदायिक भागीदारी पर आधारित है. परियोजना के तहत नदी की भौगोलिक, जलविज्ञान और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों का गहन अध्ययन किया जायेगा. इसके लिए आइआइटी-रुड़की, आइआइटी-बीएचयू, नाबार्ड कंसल्टेंसी सर्विसेज और साउथ बिहार सेंट्रल यूनिवर्सिटी के बीच एक मजबूत गठबंधन बनाया गया है.

वैज्ञानिक आधार पर इस योजना को लागू किया जायेगा

पहले चरण में गया और चतरा जिलों में नदी के बेस फ्लो को बहाल करने के लिए 21 जल निकायों का पुनरुद्धार और पुनर्भरण खाइयों का निर्माण होगा. इस परियोजना में तकनीकी विशेषज्ञता के साथ-साथ स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जायेगी. इससे न केवल तकनीकी संवेदनशीलता दिखाई देगी, बल्कि सामुदायिक सहभागिता का भी एक आदर्श प्रस्तुत होगा. नदी के पुनरुद्धार को एक स्थायी सफलता बनाने के लिए गोकुल फाउंडेशन के नेतृत्व में एक हरित क्रांति की तैयारी है. इस पहल के तहत बड़े पैमाने पर पौधारोपण शुरू किए जायेंगे. यह केवल पेड़ लगाने का अभियान नहीं है. यह लोगों को प्रकृति के साथ जोड़ने और उन्हें इस मिशन का मूल स्तंभ बनाने की योजना है. साथ ही, सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए सतत जल प्रबंधन के लिए एक टिकाऊ मॉडल विकसित किया जायेगा. निरंजना नदी पुनरुद्धार परियोजना नमामि गंगे के राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ जुड़ी एक अनूठी पहल है, जो न केवल नदी के संरक्षण का प्रयास है, बल्कि संस्कृति और पर्यावरण के अद्भुत संगम का प्रतीक भी है. इ

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