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Gaya News : एआइ का उपयोग करते समय सतर्क व नैतिक दृष्टिकोण अपनाना होगा

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Gaya News : एआइ का उपयोग करते समय सतर्क व नैतिक दृष्टिकोण अपनाना होगा

गया. मीडिया सहित दैनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के तेजी से बढ़ते प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सीयूएसबी के मास कम्युनिकेशन एंड मीडिया विभाग ने एआइ-संचालित विकास शीर्षक पर एक इंटरैक्टिव व्याख्यान सत्र का आयोजन किया. कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में आयोजित अतिथि व्याख्यान भारतीय जनसंचार संस्थान (आइआइएमसी) ढेंकनाल के निदेशक प्रो मृणाल चटर्जी ने दिया. सीयूएसबी के पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि व्याख्यान का आयोजन डीन एवं हेड प्रो के शिवशंकर की देखरेख में किया गया, जिसमें प्रो आतिश पराशर, डॉ सुजीत कुमार व डॉ अनिंद्य देव, तकनीकी सहायक मोहम्मद नूर अली इमाम हसन, शोधार्थी एवं छात्र शामिल हुए. पीआरओ ने बताया कि सत्र को दो भागों में विभाजित किया गया था, जिसमें मीडिया और संचार में एआइ की परिवर्तनकारी भूमिका के बारे में सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों तरह की जानकारी दी गयी. पहले सत्र में प्रो मृणाल चटर्जी ने विभिन्न उद्योगों में एआइ के आगमन से हुए विकास पर जनसंचार को केंद्र में रखकर एक आकर्षक और विचारोत्तेजक व्याख्यान दिया. अपने व्याख्यान में उन्होंने बताया कि कैसे एआइ उपकरण सामग्री निर्माण में क्रांति ला रहे हैं और मीडिया पेशेवरों के लिए नये अवसर प्रदान कर रहे हैं. कहानी कहने, शोध और रचनात्मकता को बढ़ाने के लिए एआइ की क्षमता का पता लगाएं अनुकूलनशीलता की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए प्रो चटर्जी ने छात्रों से कहानी कहने, शोध और रचनात्मकता को बढ़ाने के लिए एआइ की क्षमता का पता लगाने का सुझाव दिया. साथ ही, उन्होंने एआइ की चुनौतियों के प्रति आलोचनात्मक वाला भाव रखा. व्यावहारिक कार्यशाला के दूसरे सत्र में प्रो चटर्जी ने एआइ उपकरणों का उपयोग करके विचार उत्पन्न करने के लिए प्रभावी संकेत बनाने की कला का प्रदर्शन किया. व्यावहारिक प्रदर्शनों ने प्रतिभागियों को उनके शैक्षणिक और पेशेवर सफर में एआइ द्वारा पेश की जाने वाली संभावनाओं के बारे में अहम जानकारी मिली. अपने भाषण के अंत में प्रो चटर्जी ने एआइ का उपयोग करते समय सतर्क और नैतिक दृष्टिकोण अपनाने के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने संभावित जोखिमों को रेखांकित करते हुए छात्रों से एआइ का जिम्मेदारी से उपयोग करने का आग्रह किया. सीयूएसबी के मास कम्युनिकेशन एंड मीडिया विभाग के डीन और प्रमुख प्रो के शिव शंकर ने कहा कि इस सत्र में ज्ञान, कौशल विकास व आलोचनात्मक सोच का एक आदर्श मिश्रण प्रस्तुत किया गया, जिससे प्रतिभागियों को एआइ-संचालित संचार के उभरते परिदृश्य को समझने में मदद मिली.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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