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Home बिहार गया कागज बनाने के लिए काटे जाते हैं 40 प्रतिशत पेड़

कागज बनाने के लिए काटे जाते हैं 40 प्रतिशत पेड़

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कागज बनाने के लिए काटे जाते हैं 40 प्रतिशत पेड़

क्लाइमेट चैंपियन बन पर्यावरण की सुरक्षा का किया गया आह्वान

ट्रैफिक खुलने तक बंद रखें वाहनों के इंजन

जेपीएन हॉस्पिटल परिसर में निकाली गयी रैली

वरीय संवाददाता, गया जी. स्वच्छ हवा जीवन की सबसे बुनियादी जरूरत है. लोगों के जीवन के लिए जिस तरह भोजन व पानी अनिवार्य है, उसी तरह शुद्ध वायु भी जीवन के अस्तित्व की आधारशिला है. वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सामुदायिक तथा व्यक्तिगत स्तर से भी प्रयास होने चाहिए. वैश्विक स्तर पर कागज बनाने के लिए 40 प्रतिशत पेड़ों को काट दिया जाता है. हमें अपनी पहचान एक क्लाइमेट चैंपियन के रूप में भी बनाने की जरूरत है. यह बातें गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ एमइ हक ने जेपीएन हॉस्पिटल परिसर में आयोजित क्लाइमेट चैंपियन बनने के लिए निकाली गयी रैली के दौरान कहीं. उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से क्लाइमेट चैंपियन बनने के लिए विभिन्न तौर तरीके अपनाये जा सकते हैं. श्वसन रोग, हृदय रोग, कैंसर, बच्चों में अस्थमा और बुजुर्गों में सांस की समस्या प्रदूषित हवा का सीधा परिणाम है. केवल स्वास्थ्य ही नहीं, प्रदूषित हवा पर्यावरण और जलवायु पर भी गहरा असर डालती है. यह ग्रीनहाउस गैसों को बढ़ाकर जलवायु परिवर्तन को तेज करती है. खेतों की उत्पादकता घटती है, पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचता है और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर इसका असर पड़ता है.

इलेक्ट्रिक वाहन का चयन करें

क्लाइमेट चैंपियन बनने का आह्वान करते हुए डॉ हक ने कहा कि व्यक्तिगत उपायों को अपनाएं. पेट्रोल, डीजल वाले वाहन की जगह इलेक्ट्रिक वाहन का चयन करें. वाहनों के इंजन को ट्रैफिक में इंतजार के समय बंद रखें. यात्रा की योजना पहले से बनाएं, ताकि अंतिम समय में लंबे रास्ते निजी वाहन से नहीं जाना पड़े. हमारा एक छोटा कदम बड़ा बदलाव ला सकता है. उन्होंने कहा कि एक क्लाइमेट चैंपियन कागजों के कम उपयोग करके भी बन सकते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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