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Home बिहार दरभंगा Darbhanga News: लचर कार्य संस्कृति पर घिरा संस्कृत विवि, तीन घंटे तक सिंडिकेट सदस्यों का आंदोलनकारियों ने किया घेराव

Darbhanga News: लचर कार्य संस्कृति पर घिरा संस्कृत विवि, तीन घंटे तक सिंडिकेट सदस्यों का आंदोलनकारियों ने किया घेराव

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Darbhanga News: लचर कार्य संस्कृति पर घिरा संस्कृत विवि, तीन घंटे तक सिंडिकेट सदस्यों का आंदोलनकारियों ने किया घेराव

Darbhanga News: दरभंगा. कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षकेतर कर्मचारी एवं पेंशनर्स समाज संघ की ओर से मंगलवार को वीसी कार्यालय में कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित सिंडिकेट की बैठक का लगभग तीन घंटे तक घेराव किया गया. आंदोलनकारियों ने बैठक में मौजूद किसी सदस्य को तीन घंटे तक वीसी कक्ष से बाहर नहीं निकलने दिया. आंदोलनकारी एसीपी, एमएसीपी, सप्तम वेतन की अन्तर्राशि, उपादान, अर्जितावकाश एवं लंबित महंगाई राहत तथा मासिक पेंशन भुगतान करने की मांग कर रहे थे. आंदोलनकारियों का कहना था कि राज्य सरकार से सभी बकाया भुगतान के लिये एक अरब रुपये से अधिक की राशि जुलाई 2025 में विमुक्त की जा चुकी है. विवि प्रशासन की हठधर्मिता के कारण राशि उपलब्धता के बावजूद भुगतान नहीं किया जा रहा है. कुलाधिपति व राज्य सरकार से निर्देश के बावजूद विवि कार्यवाही नहीं कर टालमटोल करता आ रहा है. इन मांगों की पूर्ति के लिए पेंशनर समाज संघ द्वारा 25 नवंबर से आठ दिसंबर 2025 तक धरना भी दिया गया था.

इसमें कुलपति एवं वित्त परामर्शी द्वारा धरना स्थल पर मांगों की पूर्ति के लिये एक सप्ताह का समय दिया गया, परंतु अभी तक भुगतान नहीं किया गया. इससे आजिज होकर एक सप्ताह पूर्व मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, कुलपति, वित्त परामर्शी, सभी सिंडिकेट सदस्य, जिलाधिकारी आदि को भी मांग पत्र भेजा है तथा आज सिंडिकेट की बैठक का घेराव करने पर मजबूर होना पड़ा है. आंदोलन में रघुनंदन लाल कर्ण, विभूति नाथ झा, राम नारायण सिंह, रंगलाल राम, गोविंदजी पाठक, शंकर राम, गीता देवी, चंदन कुमार झा, अभिनव राम, राहुल राम, प्रवीण कुमार चौधरी, आकाश राम आदि शामिल थे.

पहले लंबित मुद्दों पर करे क्रियान्वयन, तब दूसरे ऐजेंडे पर विचार

इधर, प्रत्येक माह आयोजित की जानेवाली सिंडिकेट की बैठक करीब नौ माह बाद मंगलवार को बुलाए जाने पर सदस्यों ने जिम्मेदार अधिकारियों को काफी लतारा. वहीं बैठक में शामिल किसी भी एजेंडा पर निर्णय नहीं लिया जा सका. सदस्यों का कहना था कि विवि की ओर से गत बैठक की संपुष्टि तथा कार्यान्वयन प्रतिवेदन संपुष्ट करने का प्रस्ताव एजेंडा में शामिल कर दिया गया, लेकिन सभी काम लंबित रखे हुए हैं. एजेंडा में शामिल जिस एजेंडा से संबंधित जानकारी लेने का प्रयास किया जा रहा था, उससे संबंधित न संचिका उपलब्ध हो पा रही थी और न सही जानकारी ही दी जा रही थी. सभी मुद्दे लंबित पाये जा रहे थे. अंत में सिंडिकेट सदस्यों को यह निर्णय लेने के लिये मजबूर होना पड़ा कि विवि जब तक लंबित सभी कार्य पूरा नहीं कर लेता है, तब तक बैठक में अन्य किसी मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा. बैठक में आरक्षित वर्ग के शोषण का मुद्दा भी छाया रहा. इसमें प्रो. अजित कुमार चौधरी एवं विधायक प्रो. विनय कुमार चौधरी ने डाॅ संतोष कुमार पासवान को अर्हता के बाद भी पीजी साहित्य विभाग का अध्यक्ष नहीं बनाए जाने तथा साहित्य विभाग के पूर्व अध्यक्ष डाॅ रेणुका सिंहा का सेवानिवृत्ति व पेंशन भुगतान में निर्णायक व कार्यान्वयन अधिकारी द्वारा आनाकानी करने को लेकर काफी लतारा. इसका समर्थन अन्य सदस्यों ने भी किया. इसके अलावा पेंशनधारियों के बकाये का भुगतान, अतिथि शिक्षकों का लंबित मानदेय, नव नियुक्त शिक्षकों का वेतन भुगतान, अनुकंपा पाल्यों की नियुक्ति, शिक्षाकर्मियों की लंबित प्रोन्नति आदि मामले को लेकर भी सदस्यों ने काफी लतारा. बैठक में डॉ दिलीप चौधरी, रूदल राय, शकुंतला गुप्ता, डाॅ कुणाल कुमार झा, डॉ दिलीप कुमार झा, डाॅ शिवलोचन झा, डाॅ पुरेंद्र बारिक आदि मौजूद थे.

वार्षिक बजट निर्माण भी अटकाबता दें कि सिंडिकेट की यह बैठक कई मायने में खास थी. इसमें आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के वार्षिक बजट निर्माण को लेकर निर्णय लिया जाना था. वहीं बजट को लेकर ही सीनेट की बैठक की तिथि निर्धारण भी विचार होना था. इन मुद्दों पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका.

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