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शाम सात बजे का तापमान 38 डिग्री

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शाम सात बजे का तापमान 38 डिग्री

दरभंगा. तापमान का पारा कम होने का नाम नहीं ले रहा. लगातार यह ऊपर ही चढ़ता जा रहा है. दिन और रात में कोई अंतर महसूस नहीं होता. एक समान उमस भरी गरमी सताती रहती है. इसका अंदाजा इसीसे लगाया जा सकता है कि बुधवार की शाम सात बजे तापमान का पारा 38 डिग्री बता रहा था. उल्लेखनीय है कि मौसम का मिजाज काफी तल्ख बना हुआ है. सुबह नौ बजे के बाद ही सड़क गर्म तबे की तरह तपने लगता है. ऐसा लगता है मानो सड़कों से गर्म भाप निकल रहा हो. धूप में अधिक तल्खी तो नजर नहीं आती, लेकिन तीखापन उसी तरह महसूस हो रही है. इसने पूरे जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर रखा है. स्थिति यह हो गयी है कि सुबह नहीं हो रही, ऐसा महसूस होता है मानो दोपहर से ही दिन की शुरूआत हो रही है. आज का उच्चतम तापमान 42 डिग्री को पार कर गया. यूं तो इससे हर तबका बेहाल है, लेकिन सबसे अधिक परेशानी दिहाड़ी मजदूरों के सामने खड़ी हो गयी है. मौसम का यह मिजाज उनके लिए आफत साबित हो रही है. कटहलबाड़ी, चूनाभट्ठी, कादिराबाद, दोनार, चट्टी चौक सहित अन्य स्थानों पर काम की तलाश में पहुंचे दिहाड़ी मजदूर नित्य निराश लौट जाते हैं. उन्हें काम नहीं मिल पा रहा. धोई से काम की तलाश में दोनार चौक पहुंचे रमेश मुखिया ने बताया कि पिछले तीन दिनों से सुबह आठ बजे यहां पहुंच जाते हैं. मेरे साथ मेरे गांव एवं आसपास के करीब दर्जन भर अन्य मजदूर काम मिलने की उम्मीद में नाश्ता लेकर आते हैं, लेकिन कोई काम कराने वाला नहीं आता. दस बजे के बाद निराश लौटना पड़ता है. अब तो ऐसा लग रहा है कि अगर दो से तीन दिन में काम नहीं मिला तो घर का चूल्हा जलना भी मुश्किल हो जायेगा. कुछ ऐसी ही बात कटहलबाड़ी चौक पर खड़े परमेश्वर महतो ने कही. उल्लेखनीय है कि इस विकराल मौसम में जहां लोग घर से बाहर नहीं निकल पा रहे, वहां काम कौन करायेगा. अधिकांश लोगों ने अपने चल रहे भवन निर्माण को रोक दिया है. कारण, बदन झुलसाने वाली धूप में काम कराना मुश्किल हो रहा है. बुधवार को भी सड़क से लेकर चौक-चौराहे तक सूने पड़े नजर आये. मजबूरन घर से निकले लोग शीतल पेय के साथ गन्ना का जूस एवं बेल का शरबत का सहारा लेते नजर आये.

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