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Home बिहार दरभंगा जैविक खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, जाले में वैज्ञानिकों ने सिखाया केंचुआ खाद बनाने का तरीका

जैविक खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, जाले में वैज्ञानिकों ने सिखाया केंचुआ खाद बनाने का तरीका

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जैविक खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, जाले में वैज्ञानिकों ने सिखाया केंचुआ खाद बनाने का तरीका
किसानों को मिले केंचुए और वर्मीबेड

दरभंगा जाले से केशवेन्द्र प्रताप ठाकुर की रिपोर्ट

Organic Farming Farmers Training: दरभंगा जिले के जाले स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र में किसानों को जैविक खेती के प्रति प्रोत्साहित करने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय वर्मीकम्पोस्ट निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो गया. केन्द्राध्यक्ष सह वरीय वैज्ञानिक डॉ. दिव्यांशु शेखर के संरक्षण में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में मजरा और जोगियारा सहित विभिन्न गांवों के 50 किसानों ने भाग लिया. प्रशिक्षण के समापन पर सभी प्रतिभागी किसानों को केंचुए और वर्मीबेड भी वितरित किए गए.

वैज्ञानिक विधि से केंचुआ खाद बनाने की दी गई जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा ने किसानों को वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने की वैज्ञानिक विधि विस्तार से समझाई. उन्होंने बताया कि केंचुआ खाद के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता, जल धारण क्षमता और फसल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है. इसके साथ ही उन्होंने ट्राइकोडर्मा एवं पैसाइलोमाइसिस के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करने के तरीके भी साझा किए.

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45 से 50 दिनों में तैयार होगी खाद, बढ़ेगी किसानों की आय

केन्द्र की अभियांत्रिकी वैज्ञानिक इंजी. निधि कुमारी ने किसानों को गोबर, सूखी पत्तियां, फसल अवशेष, सब्जियों के छिलके और ‘आइसीनिया फेटिडा’ प्रजाति के केंचुओं की मदद से गड्ढा एवं बेड विधि द्वारा खाद तैयार करने की कड़ियों से अवगत कराया. उन्होंने कहा कि यह खाद 45 से 50 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे खेती की लागत घटती है और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलती है.

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कम लागत में इकाई स्थापना और मिट्टी जांच के गुर सिखाए

कार्यक्रम में प्रयोगशाला सहायक शशिमाला कुमारी ने मिट्टी जांच के लिए नमूना संग्रह करने की सही विधि बताई. वहीं प्रक्षेत्र प्रबंधक डॉ. चन्दन कुमार ने कम लागत में वर्मीकम्पोस्ट इकाई स्थापित करने, केंचुओं के उचित रखरखाव, खाद की छनाई, सुरक्षित भंडारण और खेतों में इसके सही उपयोग के व्यावहारिक तरीके सिखाए. अंत में किसानों को इनपुट दिए गए ताकि वे अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकें

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