दरभंगा के जाले से केशवेन्द्र प्रताप ठाकुर की रिपोर्ट
Darbhanga News: किसानों को जैविक खेती के प्रति प्रोत्साहित करने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), जाले परिसर में बुधवार से वर्मीकम्पोस्ट निर्माण पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ. वरीय वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर के संरक्षण में आयोजित इस प्रशिक्षण में दरभंगा जिले के मजरा, जोगियारा समेत विभिन्न गांवों से पहुंचे 50 किसानों ने भाग लिया.
किसानों को सिखाई गई वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने की विधि
उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा ने किसानों को केंचुआ खाद तैयार करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि वर्मीकम्पोस्ट मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, जल धारण क्षमता सुधारने और फसल उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. उन्होंने ट्राइकोडर्मा एवं पैसाइलोमिसस के उपयोग से खेत की गुणवत्ता सुधारने के उपाय भी बताए.
गोबर, फसल अवशेष और केंचुओं से बनेगी जैविक खाद
अभियांत्रिकी वैज्ञानिक इंजीनियर निधि कुमारी ने किसानों को गाय के गोबर, सूखी पत्तियां, फसल अवशेष, सब्जियों के छिलके तथा आइसीनिया फेटिडा प्रजाति के केंचुओं की सहायता से गड्ढा और बेड विधि द्वारा वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने की प्रक्रिया समझाई. उन्होंने बताया कि उचित नमी और तापमान बनाए रखने पर 45 से 50 दिनों में खाद तैयार हो जाती है. इसकी बाजार कीमत 8 से 10 रुपये प्रति किलो तक मिलती है, जिससे किसानों की लागत कम होने के साथ अतिरिक्त आय का अवसर भी मिलता है.
मिट्टी जांच और नमूना संग्रह की भी दी गई जानकारी
प्रयोगशाला सहायक शशिमाला कुमारी ने किसानों को मिट्टी जांच और नमूना संग्रह की सही विधि की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि नियमित मिट्टी परीक्षण से खेत की पोषक स्थिति का पता चलता है और उसी के अनुसार उर्वरकों का संतुलित उपयोग किया जा सकता है.
प्रशिक्षण पूरा करने वाले किसानों को मिलेंगे केंचुए
डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि “खेत बचाओ अभियान” के तहत गांव-गांव इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. प्रशिक्षण पूरा करने वाले किसानों को वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन शुरू करने के लिए केंचुए भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे जैविक खाद तैयार कर अपनी खेती में उपयोग करने के साथ उसका विपणन कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकें.
