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Home बिहार दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में अब छह मंचों के माध्यम से गतिविधियों का होगा संचालन

संस्कृत विश्वविद्यालय में अब छह मंचों के माध्यम से गतिविधियों का होगा संचालन

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संस्कृत विश्वविद्यालय में अब छह मंचों के माध्यम से गतिविधियों का होगा संचालन

संस्कृत विश्वविद्यालय में अब छह मंचों के माध्यम से गतिविधियों का होगा संचालन

दरभंगा.संस्कृत विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय की अध्यक्षता में मंगलवार को आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आइक्यूएसी) की बैठक हुई. इसमें कई अहम निर्णय लिए गए. मिथिला की ज्ञान परम्परा व शास्त्रीय पहचान को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर मजबूती से स्थापित करने पर विचार किया गया. कुलपति प्रो. पांडेय ने विश्वविद्यालय के गौरवमयी इतिहास को और अधिक सशक्त बनाने के लिए कला व साहित्यिक से संबंधित कई मंच गठन की बात कही. शास्त्र संजीवनी मंच, संस्कृत प्रचार मंच, कला रंजिनी मंच, पर्यावरण मंच, युवा चेतना मंच, महिला चेतना प्रकोष्ठ का गठन करते हुये संयोजकों को नामित किया. कहा कि इन्हीं मंचों के माध्यम से विश्वविद्यालय में अब सभी गतिविधियों को संचालित किया जाएगा.

विश्वविद्यालय में होगी मिथिला- कांची पीठ की स्थापना

कुलपति ने कहा कि मिथिला न्याय व दर्शन की धरती रही है. न्याय विद्या की रक्षा के लिए विश्वविद्यालय में मिथिला- कांची पीठ की स्थापना की जाएगी. इसके माध्यम से उतर व दक्षिण के विद्वानों का समागम होगा. कार्यशाला का आयोजन किया जायेगा. ललित कला संकाय को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया गया.

एक्यूएआर को लेकर तीन सदस्यीय कमेटी गठित

पीआरओ निशिकांत ने बताया कि वर्ष 2017-18, 18-19, 19-20 तथा 20-21 की वार्षिक गुणवत्ता आश्वासन रिपोर्ट के अनुमोदन पर विचार के क्रम में तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया. कमेटी में डॉ पुरेंद्र वारीक, डॉ साधना शर्मा व डॉ घनश्याम मिश्र को शामिल किया गया. कमेटी एक्यूएआर की जांच परख करेंगे तथा नैक की वेबसाइट पर अपलोड भी करायेंगे.

किया जायेगा त्रैमासिक वार्ता पत्रिका का प्रकाशन

विश्वविद्यालय से त्रैमासिक वार्ता पत्रिका प्रकाशन का निर्णय लिया गया. डॉ रामसेवक झा तथा डॉ यदुवीर स्वरूप शास्त्री को जिम्मेदारी दी गई. छात्र संघ चुनाव पर विचार किया गया. सूचना वैज्ञानिक डॉ नरोत्तम मिश्रा के समन्वयन में आयोजित बैठक में मुख्य रूप से डॉ पुरेंद्र बारीक, डॉ शिवलोचन झा, डॉ दिलीप कुमार झा, डॉ पवन कुमार झा, डॉ घनश्याम मिश्र, डॉ साधना शर्मा, डॉ शम्भू शरण तिवारी, डॉ यदुवीर स्वरूप शास्त्री, डॉ रामसेवक झा, छात्रा सीता कुमारी, डॉ विभव कुमार आदि मौजूद थे.

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