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हमारे शरीर को अलग-अलग कार्यों के लिए 40 माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की आवश्यकता

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हमारे शरीर को अलग-अलग कार्यों के लिए 40 माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की आवश्यकता

दरभंगा. लनामिवि के पीजी रसायन विज्ञान विभाग में शनिवार को स्वास्थ्य की चुनौतियों का समाधान: खनिजों का महत्व विषय पर सेमिनार हुआ. उद्घाटन विज्ञान संकायाध्यक्ष सह विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेम मोहन मिश्रा ने किया. बतौर मुख्य वक्ता विभाग के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ अब्दुल समद अंसारी ने कहा कि हमारे शरीर को अलग-अलग कार्यों के लिए 40 माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की आवश्यकता होती है, जो शरीर में मौजूद रहते हैं. ये माइक्रोन्यूट्रिएंट्स हमें ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा विनिमय, उत्सर्जन और ऊर्जा संवहन के प्रक्रिया आदि के लिए जरूरी है. ये माइक्रोन्यूट्रिएंट्स हमारे बाल, नाखून, त्वचा, हड्डियों और शरीर के अन्य कार्यों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं. कहा कि अपेक्षित खाद्य की कमी के कारण, आधिकांश लोग यह सामग्री अपने आहार में प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. कैल्शियम और अन्य माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की मात्रा को हमारे शरीर ठीक से अवशोषित नहीं करते हैं. अगर हम चाक का सेवन करते हैं, जो कैल्शियम का एक अच्छा स्रोत होता है, तो यह हमारे शरीर द्वारा अवशोषित नहीं होता है. वहीं आयुर्वेदिक दवाओं में मौजूद मोती पर्ल्स कैल्शियम को अधिक अच्छी तरह से अवशोषित करने में सहायक होते हैं, क्योंकि वे जैविक मूल के होते हैं. डॉ अंसारी ने कहा कि मैग्नीशियम एक महत्वपूर्ण खनिज है, जो हमारे शरीर के 300 एंजाइमेटिक प्रक्रियाओं को सक्रिय करने में मदद करता है. अन्य रोगों के अलावा, कम पोटैशियम भी नकारात्मक और आत्महत्यावादी विचारों को उत्पन्न कर सकता है. कहा कि खाने के तरीके और बर्तनों का उपयोग भी हमारे आहार की गुणवत्ता पर प्रभाव डालता है. यह हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है. संचालन करते हुये डॉ विकास कुमार सोनू ने कहा कि सेमिनार का मुख्य उद्देश्य छात्रों को खनिजों के महत्व और उनके सही उपयोग के बारे में जागरूक करना था. सेमिनार में प्रो. संजय कुमार चौधरी, डॉ अभिषेक राय, डॉ आकांक्षा उपाध्याय, डॉ प्रगति आदि मौजूद थे.

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