सरकारी अस्पताल से रेफर हुआ नवजात, पैसों की कमी बनी बाधा, बच्चा अस्पताल ने मुफ्त इलाज कर बचाई जान

Child Hospital Darbhanga: बिरौल के एक गरीब परिवार के नवजात की गंभीर हालत में निजी बच्चा अस्पताल ने बिना कोई शुल्क लिए एनआईसीयू में इलाज कर जान बचाई. अस्पताल की इस पहल की इलाके में सराहना हो रही है.

By Aaruni Thakur | June 30, 2026 9:40 PM

दरभंगा के बिरौल से शंकर सहनी की रिपोर्ट

Child Hospital Darbhanga: जन्म के कुछ ही मिनट बाद नवजात की सांसें लड़खड़ाने लगीं. सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे बड़े अस्पताल रेफर कर दिया. लेकिन परिवार के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि बच्चे को दरभंगा ले जा सके. इसी बीच एक निजी अस्पताल ने ऐसा फैसला लिया, जिसने एक परिवार की उम्मीदें फिर से जगा दीं.

मामला बिरौल का है. तीन दिन पहले एक बंजारन महिला ने सरकारी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था. जन्म के तुरंत बाद नवजात की तबीयत बिगड़ गई. डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए डीएमसीएच दरभंगा रेफर कर दिया, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण परिवार वहां नहीं जा सका.

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फिर मिली एक उम्मीद

परिजनों को किसी ने सुपौल बाजार के शेखपुरा स्थित बच्चा अस्पताल की जानकारी दी.

गंभीर हालत में नवजात को अस्पताल लाया गया, जहां अस्पताल प्रबंधक मो. तारिक अनवर उर्फ चांद और मो. तनवीर ने बिना किसी औपचारिक देरी के बच्चे को एनआईसीयू में भर्ती करा दिया. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, इलाज के लिए परिवार से कोई शुल्क नहीं लिया गया.

तीन दिन तक चली जिंदगी की जंग

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सद्दाम हुसैन ने बताया कि नवजात को सांस लेने में गंभीर परेशानी और संक्रमण था. उसकी हालत बेहद नाजुक थी.

बच्चे को तुरंत ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया और आवश्यक दवाएं शुरू की गईं. डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की टीम ने लगातार तीन दिनों तक उसकी निगरानी की.

इलाज के बाद नवजात की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और पूरी तरह स्वस्थ होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.

पिता बोले- हमारे लिए भगवान बन गया अस्पताल

बच्चे को गोद में लेकर पिता भावुक हो गए.

उन्होंने कहा, “सरकारी अस्पताल से रेफर होने के बाद हम पूरी तरह टूट चुके थे. जेब में पैसे नहीं थे. यह अस्पताल हमारे लिए भगवान बनकर आया. यहां इलाज भी किया और एक रुपया तक नहीं लिया.”

बच्चा अस्पताल, दरभंगा

अस्पताल प्रबंधन ने क्या कहा?

अस्पताल प्रबंधक मो. तारिक अनवर ने कहा कि पैसों के अभाव में किसी भी नवजात की जान नहीं जानी चाहिए. सेवा ही हमारा उद्देश्य है और आगे भी जरूरतमंद बच्चों का निशुल्क इलाज जारी रहेगा.

इलाके में हो रही पहल की सराहना

नवजात के सफल इलाज के बाद इलाके में अस्पताल की इस पहल की चर्चा हो रही है.

स्थानीय लोगों ने इसे मानवता की मिसाल बताते हुए कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए ऐसी पहल किसी वरदान से कम नहीं है. साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संस्थानों को भी जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए आगे आने की अपील की गई.

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