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Home बिहार बक्सर buxar news : मई तक पूरा करना है विशेष सर्वे का काम, 17 महीने में पहला चरण ही अधूरा

buxar news : मई तक पूरा करना है विशेष सर्वे का काम, 17 महीने में पहला चरण ही अधूरा

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buxar news : मई तक पूरा करना है विशेष सर्वे का काम, 17 महीने में पहला चरण ही अधूरा
सांकेतिक तस्वीर

buxar news : बक्सर. जिले में चल रहा विशेष सर्वे कार्य लगातार बाधाओं के कारण अपने निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे चल रहा है. भू-अभिलेख एवं परिमाप विभाग द्वारा मई माह तक किस्तवार विशेष सर्वे कार्य पूरा करने की डेडलाइन तय की गयी थी, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अमीनों की अनुपलब्धता और उन्हें बार-बार अन्य विभागीय कार्यों में लगाये जाने के कारण प्रथम फेज का काम भी अब तक पूरा नहीं हो सका है.

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बिना विशेष सर्वे अमीनों के यह महत्वाकांक्षी योजना आखिर पूरी कैसे होगी. जिले में विशेष सर्वे कार्य की शुरुआत 16 अगस्त, 2024 को की गयी थी. सरकार का उद्देश्य भूमि अभिलेखों को अद्यतन करना, जमीन से जुड़े विवादों को कम करना और डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से किसानों एवं आम लोगों को पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराना था, लेकिन कार्य शुरू होने के 17 महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी प्रथम चरण का सर्वे अधूरा है.

दिसंबर से फरवरी तक थी पहली डेडलाइन

भू-अभिलेख एवं परिमाप विभाग द्वारा यह स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि प्रथम फेज का विशेष सर्वे कार्य दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच हर हाल में पूरा कर लिया जाये. इसके बाद मई माह तक किस्तवार अन्य चरणों का कार्य समाप्त किया जाना था. लेकिन विभागीय स्तर पर अमल की स्थिति इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है. विशेष सर्वे अमीनों को बार-बार अलग-अलग अभियानों में लगाने से मूल सर्वे कार्य प्रभावित होता चला गया.

16 अगस्त से 30 सितंबर तक हड़ताल से काम रहा बाधित

विशेष सर्वे अमीनों की भूमिका इस पूरे अभियान की रीढ़ मानी जाती है, लेकिन बीते महीनों में वे अपने मूल दायित्व से अधिक अन्य कार्यों में उलझे रहे. इसका सीधा असर सर्वे कार्य की प्रगति पर पड़ा. विशेष सर्वे अमीन अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 16 अगस्त को पटना में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये थे. इस हड़ताल के कारण जिले में विशेष सर्वे का कार्य पूरी तरह ठप हो गया. अमीनों की हड़ताल से फील्ड स्तर पर मापी, नक्शा सत्यापन और डाटा संकलन का काम रुक गया. लगभग डेढ़ महीने तक सर्वे कार्य आगे नहीं बढ़ सका. हड़ताल से 30 सितंबर तक लौटे, लेकिन सर्वे से दूर हड़ताल समाप्त होने के बाद विशेष सर्वे अमीन 30 सितंबर तक अपने-अपने कार्यस्थल पर लौट आये, लेकिन उन्हें पुनः विशेष सर्वे में पूरी तरह नहीं लगाया गया. इसके बजाय सरकार द्वारा चलाये जा रहे राजस्व महाभियान में उनकी ड्यूटी लगा दी गयी.

हड़ताल से लौटे, तो राजस्व महाभियान में लगायी गयी ड्यूटी

जिले में चल रहे राजस्व महाभियान के तहत विशेष सर्वे अमीनों को शिविरों में तैनात किया गया. उन्हें आवेदन प्राप्त करने, त्रुटियों के निवारण और विभागीय वेबसाइट पर डाटा अपलोड करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी. विभागीय निर्देशों के अनुसार यह कार्य आवश्यक था, लेकिन इससे विशेष सर्वे का मूल उद्देश्य एक बार फिर पीछे छूट गया. अमीन दिनभर शिविरों में व्यस्त रहे और सर्वे फील्ड का काम लगभग ठप रहा.

छह जनवरी से कर रहे फार्मर रजिस्ट्री का काम

इसके बाद छह जनवरी से जिले की सभी पंचायतों में किसान रजिस्ट्री अभियान की शुरुआत की गयी. इस अभियान में भी विशेष सर्वे अमीनों को प्रमुख भूमिका दे दी गयी. पंचायत स्तर पर लगने वाले शिविरों में किसान रजिस्ट्री बनाने, दस्तावेज सत्यापन और ऑनलाइन प्रविष्टि का कार्य अमीनों को सौंपा गया. इसका नतीजा यह हुआ कि विशेष सर्वे का कार्य एक बार फिर पूरी तरह प्रभावित हो गया. विशेष सर्वे अमीनों का कहना है कि लंबे समय तक हड़ताल पर रहने के बाद काम पर लौटने पर राजस्व महाभियान, फिर किसान रजिस्ट्री के काम में लगा दिया गया, जिससे सर्वे कार्य के लिए समय ही नहीं मिल पाया. ऐसे में विभाग द्वारा दी गयी डेडलाइन को पूरा करना व्यावहारिक नहीं है.

अब मार्च तक करनी है विवादित जमीन की मापी

विभाग के निर्देश के अनुसार अब विशेष सर्वे अमीनों को मार्च माह तक अंचल अंतर्गत विवादित जमीन की मापी करने का आदेश दिया गया है. विभाग का मानना है कि यदि पहले से विवादित भूखंडों की मापी कर ली जाये, तो विशेष सर्वे के दौरान समस्याएं कम होंगी और आपत्तियों की संख्या घटेगी. हालांकि, इस निर्देश को लेकर भी अमीनों के बीच असमंजस की स्थिति है. नाम न छापने की शर्त पर विशेष सर्वे अमीनों ने बताया कि सामान्यत: इटीएस मशीन के माध्यम से मापी करते हैं, जिससे माप सटीक और डिजिटल रूप से सुरक्षित रहती है. लेकिन नये निर्देश के तहत उन्हें अब कड़ी और फीता से मापी करनी होगी. इससे न केवल माप की शुद्धता पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि कार्य में अधिक समय लगने की भी आशंका जतायी जा रही है.

अमीनों की कमी भी बन रही सर्वे के काम में बाधा

जिले में पहले से ही अमीनों की संख्या सीमित है. जितने अमीन उपलब्ध हैं, उनसे कई गुना अधिक काम विभाग द्वारा सौंप दिया गया है. एक ही अमीन को सर्वे, राजस्व महाभियान, किसान रजिस्ट्री और अब विवादित जमीन की मापी जैसे कार्यों में लगाने से किसी एक कार्य में गुणवत्ता और गति दोनों प्रभावित हो रही हैं.

किसानों और आमलोगों की बढ़ी चिंता

विशेष सर्वे में देरी का सीधा असर किसानों और जमीन मालिकों पर पड़ रहा है. जमीन के रिकॉर्ड अद्यतन नहीं होने से दाखिल-खारिज, नामांतरण, बैंक ऋण और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में लोगों को परेशानी हो रही है. कई ग्रामीणों का कहना है कि सर्वे के नाम पर महीनों से इंतजार किया जा रहा है, लेकिन जमीन पर काम नजर नहीं आ रहा.

लगातार चल रहे कार्यों का विशेष सर्वे में मिलेगा लाभ

प्रभारी जिला बंदोबस्त पदाधिकारी रोहित कुमार ने कहा कि राजस्व महाभियान, किसान रजिस्ट्री और विवादित भूमि की पूर्व मापी का सीधा लाभ विशेष सर्वे के दौरान मिलेगा. राजस्व महाभियान से भूमि से जुड़े लंबित मामलों का निष्पादन हुआ, जिससे रिकॉर्ड में सुधार आया. किसान रजिस्ट्री के माध्यम से वास्तविक किसानों का डाटा उपलब्ध होने से स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट हुई. वहीं, विवादित भूमि की पहले मापी कर लेने से सीमाओं को लेकर होने वाले झगड़े कम होंगे. इन सभी प्रक्रियाओं से विशेष सर्वे के समय आपत्तियों की संख्या घटेगी, कार्य तेजी से पूरा होगा और भूमि विवादों में उल्लेखनीय कमी आयेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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