[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home बिहार बक्सर बक्सर में बोले आचार्य कृष्णानंद पौराणिक- सभी मानस रोगों की जड़ है लोभ, भागवत कथा है इसकी अचूक दवा

बक्सर में बोले आचार्य कृष्णानंद पौराणिक- सभी मानस रोगों की जड़ है लोभ, भागवत कथा है इसकी अचूक दवा

0
बक्सर में बोले आचार्य कृष्णानंद पौराणिक- सभी मानस रोगों की जड़ है लोभ, भागवत कथा है इसकी अचूक दवा
श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन देते आचार्य कृष्णानंद जी पौराणिक

बक्सर से ओंकार नाथ मिश्र की रिपोर्ट :
Buxar News:
शहर के रामरेखा घाट स्थित श्री रामेश्वरनाथ मंदिर परिसर में सर्वजन कल्याण सेवा समिति सिद्धाश्रम धाम के देखरेख में चल रहे 18वें धर्मायोजन के अंतर्गत श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के तीसरे दिन बुधवार को व्यास पीठ से मानस रोगों की चिकित्सा पर विस्तार से प्रवचन हुआ. व्यास पीठ पर विराजमान आचार्य श्री कृष्णानंद जी पौराणिक ने कहा कि मनुष्य को दो तरह के रोगों का भय सताता है. पहला दैहिक और दूसरा मानसिक रोग. आचार्य श्री ने कहा कि देह भौतिक है.

दैहिक रोग का इलाज डॉक्टर से दवा लेकर संभव है. उसे देखकर, छूकर और जांच कर पहचाना जा सकता है. लेकिन मानस रोग यानी मोह, काम, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या और द्वेष जैसे रोग कष्टप्रद और भयंकर हैं. इनकी दवा केवल धर्म शास्त्रों में है और आध्यात्मिक चिकित्सा ही इसका एकमात्र उपाय है.

सभी मानस रोगों में सबसे खतरनाक है लोभ

आचार्य श्री ने कहा कि इन सभी मानस रोगों में लोभ सबसे खतरनाक है. क्योंकि लोभ सभी पाप, अत्याचार और अनीति की जननी है. यह भविष्य के लिए वर्तमान में जन्म लेने वाला कुविचार है. जो भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों को कलंकित कर देता है. लोभ का परिणाम सिर्फ नाश है. लोभ मन में आते ही मनुष्य राक्षस बन जाता है.

हिरण्याक्ष प्रसंग का किया उल्लेख

भगवान के शूकर अवतार का उदाहरण देते हुए पौराणिक जी ने कहा कि महात्मा कश्यप के पुत्र हिरण्याक्ष के मन में लोभ आया. उसने सारी रत्न और स्वर्ण धातुओं को अपना बनाना चाहा. फिर उसने पूरी वसुंधरा का ही हरण कर लिया. भगवान नारायण ने सूकर अवतार लेकर हिरण्याक्ष का वध किया और पृथ्वी को दान कर दिया. जिस धरा पर आज पूरी दुनिया बसी है. आचार्य श्री ने कहा कि आज समाज में अशांति का कारण यही मानसिक रोग लोभ है. स्वार्थ ने मानव मूल्य का नाश कर दिया है. श्रीमद्भागवत कथा ही इस लोभ की अचूक दवा है. कथा सुनने से संसार की सच्चाई पता चलती है और मनुष्य परमार्थ के मार्ग पर चल पड़ता है. परीक्षित इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं.

Also Read: बक्सर में 6 लाख की लूटकांड का 48 घंटे में खुलासा, थानाध्यक्ष चंदन कुमार को SP ने किया सम्मानित

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel