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Home बिहार बक्सर buxar news : जलछाजन कर्मियों ने निदेशालय के विरुद्ध खोला मोर्चा

buxar news : जलछाजन कर्मियों ने निदेशालय के विरुद्ध खोला मोर्चा

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buxar news : जलछाजन कर्मियों ने निदेशालय के विरुद्ध खोला मोर्चा
सांकेतिक तस्वीर

buxar news : बक्सर. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जलछाजन विकास 2.0 के अंतर्गत हाल ही में आयोजित राज्यस्तरीय ‘वाटरशेड महोत्सव’ को लेकर जिले के जलछाजन कर्मियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है.

योजना के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले डब्ल्यूडीटी वाटरशेड डेवलपमेंट टीम विशेषज्ञों को इस महोत्सव में आमंत्रित नहीं किये जाने पर जिलास्तरीय जलछाजन कर्मचारी संघ ने इसे गंभीर अन्याय बताते हुए भूमि संरक्षण निदेशालय एवं बिहार जलछाजन विकास समिति के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है. जिलास्तरीय जलछाजन कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि वाटरशेड महोत्सव जैसे महत्वपूर्ण राज्यस्तरीय कार्यक्रम में उन्हीं विशेषज्ञों की अनदेखी कर दी गयी, जो वर्षों से योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य कर रहे हैं. संघ का कहना है कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना पीएमकेएसवाइ, राज्य योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना तथा सात निश्चय जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का वास्तविक क्रियान्वयन डब्ल्यूडीटी विशेषज्ञों के माध्यम से ही संभव हो पाता है.

खेत-खलिहान से लेकर किसानों के दरवाजे तक सिंचाई और जल संरक्षण का लाभ पहुंचाने में इन कर्मियों की अहम भूमिका रहती है, बावजूद इसके उन्हें सम्मान और सहभागिता से वंचित किया गया. संघ ने आरोप लगाया कि भूमि संरक्षण निदेशालय के कुछ पदाधिकारी जानबूझकर डब्ल्यूडीटी विशेषज्ञों को महोत्सव से दूर रखे हुए हैं. इसके पीछे कारण बताते हुए कहा गया कि कुछ अधिकारियों द्वारा अपने अधीनस्थ कर्मियों के साथ किये गये दुर्व्यवहार और अनियमितताओं को छुपाने के उद्देश्य से ही इन विशेषज्ञों को कार्यक्रम से अलग रखा गया, ताकि मंत्री और प्रधान सचिव को वास्तविक स्थिति की जानकारी न मिल सके. संघ के अनुसार, यह न केवल कर्मियों के सम्मान का हनन है, बल्कि शासन-प्रशासन को गुमराह करने का भी प्रयास है. जिला अध्यक्ष ने आगे कहा कि एक ओर राज्य सरकार विभिन्न विभागों में संविदा कर्मियों के मानदेय में वृद्धि कर रही है, वहीं दूसरी ओर भूमि संरक्षण निदेशालय ने जलछाजन कर्मियों का मानदेय 35 हजार से घटाकर महज 13,200 रुपये कर दिया है. यह कदम न सिर्फ आर्थिक शोषण का उदाहरण है, बल्कि कर्मियों के मनोबल को तोड़ने वाला भी है.

मंत्री व प्रधान सचिव से शिकायत की दी चेतावनी

उन्होंने बताया कि मानदेय कटौती और अन्यायपूर्ण व्यवहार के खिलाफ विवश होकर जलछाजन कर्मियों ने उच्च न्यायालय की शरण ली है, जहां मामला विचाराधीन है. जिलास्तरीय जलछाजन कर्मचारी संघ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि निदेशालय के तानाशाही रवैये और उच्चाधिकारियों को दी जा रही भ्रामक जानकारियों को अब बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. संघ ने चेतावनी दी है कि जल्द ही साक्ष्यों के साथ मंत्री एवं प्रधान सचिव को लिखित शिकायत सौंपी जायेगी, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो सके. साथ ही, संघ ने यह भी मांग की है कि जलछाजन योजनाओं के वास्तविक शिल्पकारों को उचित सम्मान, मानदेय और भागीदारी दी जाये, अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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