जिन किसानों के पास सिंचाई करने का साधन हैं वह कम पानी से धान की रोपनी कर दें.जीवन रक्षक सिंचाई करते रहे.इसमें पानी नहीं लगाये.धान के बिचड़ा में किसी प्रकार के उर्वरक का उपयोग नहीं करें.वर्षा होते ही इस पौधों से अनाज पैदा कर सकते हैं.धान की रोपाई कतार में करें ताकि किसी प्रकार के रोगों का प्रभाव न हो.जीवन रक्षक सिंचाई के साथ रोपाई करें.अभी अनुमान है कि एक सप्ताह बाद कुछ बारिश हो सकती हैं.रोपाई के समय फासफोरस एवं पोटाश का प्रयोग करें.खाद का प्रयोग संतुलित मात्रा में ही प्रयोग करें.पानी की कमी वाले जगहों पर ज्वार एवं बाजरा की खेती करें.इसमें रोग भी नहीं लगता हैं. – रामकेवल सिंह,कृषि वैज्ञानिक
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