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अस्पताल में तीन दिनों से बच्चों के डाॅक्टर नदारद, लटका रहा ताला

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अस्पताल में तीन दिनों से बच्चों के डाॅक्टर नदारद, लटका रहा ताला

डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में बुधवार को बच्चों के डाॅक्टर नहीं रहने से ओपीडी कक्ष में ताला लटका मिला. मरीजों ने बताया कि सोमवार और मंगलवार को भी शिशु चिकित्सक कक्ष का ताला नहीं खुला था. वहीं शनिवार को डाॅक्टर छुट्टी पर ही थे. ऐसे में शिशु ओपीडी का लाभ मरीजों को मिल नहीं पा रहा है. सोमवार, मंगलवार और बुधवार को डाॅक्टर बगैर किसी सूचना के गायब रहे. अस्पताल उपाधीक्षक डाॅ गिरीश कुमार सिंह ने अस्पताल में पदस्थापित बच्चों के दोनों डाॅक्टरों के वेतन निकासी पर रोक लगा दी है. इसके साथ ही उपाधीक्षक ने सिविल सर्जन को डाॅक्टरों की ऐसी लापरवाही व बगैर किसी सूचना के गायब रहने की स्थिति की लिखित शिकायत कर उनसे कार्रवाई करने की भी मांग की है. बावजूद रोस्टर के अनुसार डाॅक्टर ड्यूटी करने नहीं पहुंच रहे हैं. अस्पताल में दो नये शिशु चिकित्सक डाॅ सतीश कुमार और डाॅ उमेश कुमार की पदस्थापना हुई, लेकिन अधिकतर दोनों डाॅक्टर गायब रहते हैं. सिविल सर्जन डाॅ सुरेश चंद्र सिन्हा की पहल पर तय रोस्टर के अनुसार अस्पताल में सोमवार से शनिवार तक प्रतिदिन इनकी ड्यूटी लगायी गयी, जहां सोमवार से बुधवार तक डॉ उमेश कुमार व गुरुवार से शनिवार तक डॉ सतीश कुमार की ड्यूटी लगायी गयी. इन चिकित्सकों की पदस्थापना को ज्यादा दिन नहीं हुआ, बिना सूचना के चिकित्सक अनुपस्थित रहने लगे. अनुमंडलीय अस्पताल में उपाधीक्षक द्वारा बायोमेट्रिक के आधार पर ही वेतन देने की बात कही, लेकिन अस्पताल में पदस्थापित डाॅक्टरों को न ही वेतन की चिंता है, न हाजिरी की और न ही कार्रवाई की. सीएस के निर्देश पर शिशु चिकित्सकों की पदस्थापना के बाद से नयी ओपीडी का संचालन शुरू हुआ था. अस्पताल में प्रतिदिन चार-पांच डिलेवरी होती है, बच्चों के डाॅक्टर नहीं रहने पर परिजनों को आर्थिक व मानसिक रूप से परेशान होना पड़ता है. सीएस ने कहा कि सूचना मिली है कि बच्चों के डाॅक्टर गायब हैं. मामले की जांच कर ड्यूटी से गायब रहने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई की जायेगी.

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