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Home बिहार बक्सर स्वास्थ्य विभाग का अलर्ट मोड: बक्सर में कुपोषण का खतरा गहराया, आईसीडीएस रिपोर्ट में हुआ खुलासा

स्वास्थ्य विभाग का अलर्ट मोड: बक्सर में कुपोषण का खतरा गहराया, आईसीडीएस रिपोर्ट में हुआ खुलासा

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स्वास्थ्य विभाग का अलर्ट मोड: बक्सर में कुपोषण का खतरा गहराया, आईसीडीएस रिपोर्ट में हुआ खुलासा
सांकेतिक तस्वीर

Bihar News: बक्सर में बच्चों में कुपोषण और अतिकुपोषण की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है. अप्रैल 2026 के आईसीडीएस आंकड़ों के अनुसार जिले में छह माह से पांच वर्ष तक की उम्र के 3510 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए हैं. जबकि 5767 बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं. यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है.

विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में कुपोषण के पीछे कई सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण जिम्मेदार हैं. कम उम्र में शादी, गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त पोषण नहीं मिलना, दूषित पानी का सेवन और बच्चों की सही देखभाल नहीं होना इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में आज भी जागरूकता की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं के खानपान पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता, जिसका सीधा असर नवजात बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ता है.

गर्भावस्था में पोषण की कमी से बढ़ रही समस्या

आईसीडीएस अधिकारियों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान यदि महिलाओं को संतुलित आहार, आयरन, कैल्शियम और अन्य आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिलते हैं तो जन्म लेने वाले बच्चे कमजोर होते हैं. ऐसे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम रहती है और वे जल्दी कुपोषण का शिकार हो जाते हैं. इसके अलावा जिले के कई इलाकों में स्वच्छ पेयजल की समस्या भी बनी हुई है. दूषित पानी के सेवन से बच्चों में संक्रमण, दस्त और अन्य बीमारियां बढ़ रही हैं, जिससे उनका शारीरिक विकास प्रभावित हो रहा है.

कम उम्र में शादी भी बड़ी वजह

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार किशोरावस्था में शादी और जल्दी गर्भधारण भी बच्चों में कुपोषण की बड़ी वजह है. कम उम्र की माताएं शारीरिक रूप से पूरी तरह विकसित नहीं होती हैं, जिससे मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है. ऐसे मामलों में जन्म लेने वाले बच्चों का वजन कम होता है और उनमें कुपोषण की आशंका अधिक रहती है.

आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से चल रही निगरानी

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस) कवि प्रिया ने बताया कि जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच की जा रही है. गंभीर रूप से अतिकुपोषित बच्चों को चिन्हित कर पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जा रहा है. साथ ही गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक भोजन, स्तनपान और साफ-सफाई के प्रति जागरूक किया जा रहा है.

हर साल बदलते आंकड़े

वर्ष अतिकुपोषित बच्चे कुपोषित बच्चे

  • 2023 5226 6740
  • 2024 5084 6361
  • 2025 6375 7926
  • 2026 3510 5767

किस प्रखंड में कितने बच्चे प्रभावित

जिले के बक्सर प्रखंड में सबसे अधिक 758 अतिकुपोषित और 984 कुपोषित बच्चे पाए गए हैं. इसके अलावा डुमरांव, इटाढ़ी, राजपुर और सिमरी प्रखंडों में भी बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण की समस्या से जूझ रहे हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जागरूकता, पोषण और स्वच्छता पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर हो सकती है.

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मैं रागिनी शर्मा वर्तमान में पटना स्थित प्रभात खबर डिजिटल की टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं. यहां मैं बिहार के विभिन्न जिलों से जुड़ी अहम खबरों, राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर काम कर रही हूं. मेरा उद्देश्य हर खबर को सरल, सटीक और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक न सिर्फ जानकारी प्राप्त करें बल्कि उससे जुड़ाव भी महसूस करें और डिजिटल पत्रकारिता को और अधिक सार्थक बनाया जा सके. पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही मैंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. अपने कॉलेज के समय में हिंदुस्तान के साथ इंटर्नशिप के दौरान मुझे पहली बार वेब पोर्टल पर खबर लिखने और डिजिटल न्यूज राइटिंग का व्यावहारिक अनुभव मिला. इसी दौरान मैंने न्यूज़ लेखन, हेडलाइन स्ट्रक्चर और डिजिटल स्टोरी प्रेजेंटेशन की बुनियादी समझ विकसित की. इसके बाद वर्ष 2025 में पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरा करने के साथ ही मैंने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की. डिजिटल मीडिया में मेरी पहली भूमिका फर्स्ट बिहार झारखंड के साथ रही, जहाँ मैंने एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग के माध्यम से बिहार के जमीनी मुद्दों को कवर किया. इस दौरान मैंने राज्य की राजनीति, सामाजिक सरोकारों और आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग की.
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