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Home बिहार बक्सर आंगनबाड़ी केंद्रों में डिजिटल क्रांति, 11 रजिस्टर बंद, पोषण ट्रैकर से होगा काम

आंगनबाड़ी केंद्रों में डिजिटल क्रांति, 11 रजिस्टर बंद, पोषण ट्रैकर से होगा काम

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आंगनबाड़ी केंद्रों में डिजिटल क्रांति, 11 रजिस्टर बंद, पोषण ट्रैकर से होगा काम
सांकेतिक तस्वीर

ब्रह्मपुर (बक्सर). प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए सेविकाओं को बड़ी राहत दी है. समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत समेकित बाल विकास सेवा निदेशालय ने राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर भौतिक रूप से उपयोग किये जा रहे 11 महत्वपूर्ण रजिस्टरों (पंजियों) को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है.अब इन केंद्रों का तमाम कामकाज कागजों के बजाय पूरी तरह डिजिटल मोड में होगा। सेविकाओं को अब इन 11 श्रेणियों का डेटा केवल ””पोषण ट्रैकर”” एप्लीकेशन पर ही अपडेट करना होगा. अतिरिक्त कार्यभार से मिलेगी मुक्ति आईसीडीएस निदेशक के हस्ताक्षर से जारी पत्र संख्या 1967 के अनुसार, यह निर्णय भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा प्राप्त दिशा-निर्देशों के आलोक में लिया गया है. विभाग का मानना है कि आंगनबाड़ी सेविकाओं को फील्ड वर्क और बच्चों के पोषण पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय लंबे समय तक कागजी रजिस्टर भरने में समय व्यतीत करना पड़ता था. इस डिजिटल पहल से न केवल सेविकाओं का कार्यभार कम होगा, बल्कि डेटा में पारदर्शिता भी आएगी. ये रजिस्टर अब इतिहास का हिस्सा होंगे सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार परिवार सर्वेक्षण पंजी और पूरक पोषाहार स्टॉक पंजी, पूरक पोषाहार वितरण और स्कूल पूर्व शिक्षा पंजी, गर्भावस्था एवं प्रसव पंजी, विटामिन ‘ए’ पंजी, गृह भ्रमण पंजी और संदर्भ सेवा पंजी, मासिक/वार्षिक प्रतिवेदन और बच्चों की वृद्धि निगरानी से संबंधित रजिस्टर. टीकाकरण से संबंधित पंजी को छोड़कर शेष सभी मुख्य रजिस्टरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित कर दिया गया हैअब इन भौतिक पंजियों का संधारण नहीं किया जाएगा. डैशबोर्ड से होगी मॉनीटरिंग सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब सभी प्रकार के प्रतिवेदन सीधे पोषण ट्रैकर एप से ही प्राप्त किए जाएंगे. सभी जिला प्रोग्राम पदाधिकारियों और बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया है कि वे जिला स्तरीय डैशबोर्ड के माध्यम से यह सुनिश्चित करें कि केंद्रों पर इन 11 पंजियों का भौतिक उपयोग बंद हो गया है और डेटा नियमित रूप से एप पर अपलोड किया जा रहा है. पारदर्शिता और त्वरित रिपोर्टिंग में मिलेगी मदद इस व्यवस्था के लागू होने से विभाग के पास राज्य के हर केंद्र का ””रियल टाइम”” डेटा उपलब्ध रहेगा. किस केंद्र पर कितना स्टॉक है, कितने बच्चों का टीकाकरण हुआ और कितने बच्चों का वजन लिया गया, इसकी जानकारी अब एक क्लिक पर उपलब्ध होगी। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली देरी और डेटा में हेरफेर की गुंजाइश खत्म हो जाएगी.

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