2 बार इंटरव्यू में फेल, लेकिन अधिकारी बनने का था जुनून, BDO बने बिहार के दिव्यांग बेटे की कहानी पढ़िए

BPSC Success Story: बिहार के जहानाबाद जिले के विकास कुमार बीपीएससी की परीक्षा पास कर बीडीओ बन गए हैं. उनकी सफलता यह बताती है कि अपनी मंजिल को पाने के लिए शारीरिक चुनौती बाधा नहीं बन सकती. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, समाज और गांव के लोगों को दिया.

By Preeti Dayal | June 26, 2026 12:13 PM

BPSC Success Story: “अगर इरादे मजबूत हों, तो मंजिल तक पहुंचने से कोई भी चुनौती नहीं रोक सकती.” बिहार के जहानाबाद जिले के डेढ़सैया गांव के रहने वाले विकास कुमार ने इस बात को अपनी जिंदगी से सच साबित कर दिया. दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने कभी अपनी परिस्थितियों को कमजोरी नहीं बनने दिया. आज उनकी कहानी हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.

एक तरफ मेहंदी, दूसरी तरफ अधिकारी बनने की खुशी

विकास की सफलता की सबसे खास बात यह है कि जिस दिन उनके घर में शादी की मेहंदी की रस्में चल रहीं थीं, उसी दिन BPSC का रिजल्ट आया और उनका चयन प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के पद पर हो गया एक ही दिन उन्हें जिंदगी की दो सबसे बड़ी खुशियां मिलीं.

विकास बोले- पिता ने हर कदम पर दिया साथ

एक मीडिया से बात करते हुए विकास ने बताया कि बचपन से ही उनके पिता हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे. स्कूल हो या कोचिंग, पिता उन्हें रोज साइकिल पर बैठाकर ले जाते थे. पहले उन्होंने आईआईटी क्रैक किया और बाद में दिल्ली में सिविल सेवा की तैयारी की. कोरोना के दौरान घर लौटने के बाद उन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी जारी रखी. इस बीच उनका चयन पटना हाईकोर्ट में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर के पद पर हुआ, लेकिन उनका सपना यहीं नहीं रुका.

दो बार BPSC के इंटरव्यू तक भी पहुंचे

नौकरी के साथ पढ़ाई करना आसान नहीं था. दो बार BPSC के इंटरव्यू तक पहुंचकर भी सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. लगातार मेहनत करते रहे और आखिरकार तीसरी बार के प्रयास में उन्होंने BDO बनने का सपना पूरा कर लिया. इस सफर में उन्हें एक बड़ा निजी दुख भी झेलना पड़ा. पटना हाईकोर्ट में नौकरी मिलने के सिर्फ 22 दिन बाद उनकी मां का निधन हो गया. इसके बावजूद उन्होंने खुद को संभाला और अपने लक्ष्य पर डटे रहे.

विकास की सफलता अन्य युवाओं को कर रही प्रेरित

विकास कुमार की कहानी बताती है कि सफलता शरीर की ताकत से नहीं, बल्कि हौसले, मेहनत और कभी हार न मानने वाले जज्बे से मिलती है. उनकी यह उपलब्धि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किलों के बीच भी अपने सपनों को सच करना चाहता है. ऐसे में विकास के परिजन उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे.

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