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Home Rajya बिहार पिता की छोटी दुकान, किताबों के लिए नहीं थे पैसे, ट्यूशन पढ़ाकर की तैयारी, DSP बनी बिहार की बेटी की संघर्ष भरी कहानी

पिता की छोटी दुकान, किताबों के लिए नहीं थे पैसे, ट्यूशन पढ़ाकर की तैयारी, DSP बनी बिहार की बेटी की संघर्ष भरी कहानी

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पिता की छोटी दुकान, किताबों के लिए नहीं थे पैसे, ट्यूशन पढ़ाकर की तैयारी, DSP बनी बिहार की बेटी की संघर्ष भरी कहानी
मुजफ्फरपुर की जया बनीं DSP

BPSC Success Story: कहते हैं कि सपने वही पूरे करते हैं जो हालात से हार नहीं मानते. बिहार के मुजफ्फरपुर की बेटी जया ने यही साबित कर दिखाया है. सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बीच पली-बढ़ी जया ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर डीएसपी का पद प्राप्त किया है.

ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में 934वीं रैंक हासिल करने वाली जया की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि यह उनकी लगातार तीसरी बड़ी उपलब्धि है. इससे पहले भी वह दो बार बीपीएससी परीक्षा में चयनित हो चुकी हैं.

छोटी दुकान से चलता था घर

जया मुजफ्फरपुर जिले के तुर्की थाना क्षेत्र के छाजन गांव की रहने वाली हैं. वर्तमान में उनका परिवार गोबरसाही में रहता है. उनके पिता सुनील कुमार एक छोटी सी दुकान चलाते हैं. इसी दुकान की आमदनी से पूरे परिवार का खर्च चलता है. परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन बेटी के सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया गया. आज जया की सफलता ने पूरे परिवार की आंखें नम कर दी हैं.

किताबों के लिए नहीं थे पैसे, लाइब्रेरी बनी सहारा

जया ने अपनी स्कूली शिक्षा मुजफ्फरपुर से पूरी की. इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली चली गईं. उन्होंने जेएनयू से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की. दिल्ली में सिविल सेवा की तैयारी आसान नहीं थी. महंगी कोचिंग और पढ़ाई का खर्च उठाना परिवार के लिए संभव नहीं था.

ऐसे में जया ने हार नहीं मानी. उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया. उसी पैसे से अपनी पढ़ाई और टेस्ट सीरीज का खर्च निकाला.

परिजनों ने बताया कि कई बार नई किताबें खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे. ऐसे समय में लाइब्रेरी ही उनकी सबसे बड़ी साथी बन गई. घंटों लाइब्रेरी में बैठकर उन्होंने तैयारी की और अपने सपनों को जिंदा रखा.

पहली नौकरी मिली, लेकिन सपना बड़ा था

जया का लक्ष्य सिर्फ नौकरी पाना नहीं था. वह खुद को और बेहतर साबित करना चाहती थीं. उन्होंने 67वीं बीपीएससी परीक्षा पास कर राजस्व अधिकारी का पद हासिल किया. यह उनके संघर्ष का पहला बड़ा परिणाम था. लेकिन उन्होंने यहीं रुकने का फैसला नहीं किया.

दूसरी बार भी मिली सफलता

67वीं बीपीएससी में सफलता के बाद जया ने 68वीं बीपीएससी परीक्षा दी. इस बार उनका चयन असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ डिसेबिलिटी विभाग के पद पर हुआ. लगातार दूसरी सफलता ने उनका आत्मविश्वास और मजबूत कर दिया.

नौकरी के साथ पढ़ाई, फिर बन गईं DSP

वर्तमान में जया सीतामढ़ी में कार्यरत हैं. नौकरी मिलने के बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी. दिन में काम और रात में पढ़ाई का सिलसिला चलता रहा. आखिरकार 70वीं बीपीएससी परीक्षा में उन्होंने अपना सबसे बड़ा सपना पूरा कर लिया. इस बार उनका चयन डीएसपी पद के लिए हुआ.

मां बोलीं- हमारी बेटी ने सपनों को सच कर दिया

मीडिया से बातचीत में जया की मां दुर्गा रानी ने बताया कि घर में साधनों की कमी जरूर थी, लेकिन बेटी के हौसले की कभी कमी नहीं रही. उन्होंने बताया कि जया बचपन से ही मेहनती थी. जो ठान लेती थी, उसे पूरा करके ही मानती थी. आज बेटी की सफलता ने पूरे परिवार को गर्व से भर दिया है.

बेटियों के लिए बनीं मिसाल

जया की कहानी सिर्फ एक सफलता की कहानी नहीं है. यह उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो आर्थिक तंगी और कठिन परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को छोड़ने की सोचते हैं. छोटी दुकान चलाने वाले पिता की बेटी ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, मंजिल जरूर मिलती है.

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अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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