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Home बिहार बिहारशरीफ नालंदा में ई-ग्राम कचहरी व्यवस्था फेल, डेढ़ साल में 1575 मामलों में सिर्फ 686 का निष्पादन

नालंदा में ई-ग्राम कचहरी व्यवस्था फेल, डेढ़ साल में 1575 मामलों में सिर्फ 686 का निष्पादन

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नालंदा में ई-ग्राम कचहरी व्यवस्था फेल, डेढ़ साल में 1575 मामलों में सिर्फ 686 का निष्पादन
मीटिंग की तस्वीर
Nalanda News : (कंचन कुमार) नालंदा में पंचायत स्तर पर लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय देने के उद्देश्य से शुरू की गई ई-ग्राम कचहरी व्यवस्था नालंदा जिले में उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही है. डेढ़ साल में दर्ज 1575 मामलों में से केवल 686 मामलों का ही निष्पादन हो सका है. लंबित मामलों की बढ़ती संख्या अब प्रशासनिक मॉनिटरिंग और पंचायत न्याय व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है.

दीवानी और फौजदारी मामलों में धीमी रफ्तार

ई-ग्राम कचहरी पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक 1198 दीवानी और 377 फौजदारी मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें सिर्फ 544 दीवानी और 142 फौजदारी मामलों का निष्पादन हो पाया है. आंकड़े बताते हैं कि दीवानी मामलों में करीब 45.41 प्रतिशत और फौजदारी मामलों में मात्र 37.66 प्रतिशत मामलों का ही समाधान हो सका है. इससे साफ है कि पंचायत स्तर पर त्वरित न्याय व्यवस्था अभी पूरी तरह प्रभावी नहीं बन पाई है.

बिहारशरीफ बना सबसे बेहतर प्रखंड

प्रखंडवार समीक्षा में बिहारशरीफ सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला प्रखंड रहा है. यहां दर्ज 62 मामलों में 52 मामलों का निष्पादन किया गया, जो करीब 84 प्रतिशत सफलता दर है. कतरीसराय में करीब 66.7 प्रतिशत और बिंद में लगभग 62 प्रतिशत मामलों का समाधान हुआ है. वहीं हिलसा, थरथरी और राजगीर में भी 50 प्रतिशत से अधिक मामलों का निष्पादन होने से वहां की व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर मानी जा रही है.

अस्थावां और इस्लामपुर सबसे फिसड्डी

अस्थावां और इस्लामपुर प्रखंडों की स्थिति सबसे खराब बताई जा रही है. यहां अब तक एक भी मामले का निष्पादन नहीं हो सका है. वहीं चंडी और हरनौत जैसे प्रखंडों में भी निष्पादन दर 20 प्रतिशत से कम रही. ग्रामीणों का कहना है कि कई पंचायतों में नियमित सुनवाई नहीं होने के कारण लोग फिर पारंपरिक न्याय व्यवस्था की ओर लौटने को मजबूर हो रहे हैं.

लाखों खर्च के बावजूद व्यवस्था सवालों में

राज्य सरकार ग्राम कचहरी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए हर वर्ष लाखों रुपये खर्च कर रही है. सितंबर 2025 में ग्राम कचहरी सचिवों और संविदाकर्मियों के मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई थी. इसके बावजूद कई पंचायतों में मामलों के निष्पादन की गति बेहद धीमी बनी हुई है. ग्रामीणों का आरोप है कि कई न्याय मित्र नियमित रूप से ई-ग्राम कचहरी में समय नहीं देते और निजी कार्यों में अधिक व्यस्त रहते हैं.

डिजिटल न्याय की पहल, लेकिन जमीनी दिक्कतें बरकरार

ई-ग्राम कचहरी व्यवस्था के तहत ग्रामीण ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं और फैसले की प्रति भी डिजिटल माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं. सरकार का उद्देश्य पंचायत स्तर पर न्याय प्रक्रिया को पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त बनाना है. हालांकि कई पंचायतों में इंटरनेट की समस्या, तकनीकी जानकारी की कमी और कमजोर मॉनिटरिंग इस व्यवस्था की राह में बड़ी चुनौती बनी हुई है.

नूरसराय और हिलसा में सबसे ज्यादा मामले

नूरसराय प्रखंड में सबसे अधिक 192 मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें 161 दीवानी और 31 फौजदारी मामले शामिल हैं. यहां 78 दीवानी और चार फौजदारी मामलों का निपटारा किया गया है. इसके अलावा हिलसा में 150, गिरियक में 149 और रहुई में 121 मामले दर्ज हुए हैं. लगातार बढ़ते लंबित मामलों ने पंचायत न्याय व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

प्रशासन ने सुधार का दिया भरोसा

प्रशासन का दावा है कि ई-ग्राम कचहरी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए नियमित समीक्षा की जा रही है. पंचायत स्तर पर छोटे विवादों का स्थानीय समाधान कर लोगों को थाने और अदालतों के चक्कर से बचाने का प्रयास किया जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक तकनीकी सुधार, बेहतर मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय कर लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी लाई जाएगी.

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Vivek Singh : विवेक सिंह की डिजिटल मीडिया और जनसरोकारों से जुड़े विषयों में विशेष रुचि रही है. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वे बिहार के मिथिला क्षेत्र के निवासी हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं. उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई की है. शिक्षा के दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, जनसंचार, फोटो जर्नलिज्म, मोबाइल जर्नलिज्म (MOJO) और मीडिया रिसर्च की गहन समझ विकसित की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने मीडिया प्लेटफॉर्म The Newsdharma के माध्यम से ग्राउंड रिपोर्टिंग, जनमत संग्रह (Public Opinion), सामाजिक मुद्दों की कवरेज और स्थानीय समाचारों के संकलन का व्यापक अनुभव प्राप्त किया. उन्होंने विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जनहित से जुड़े विषयों पर जमीनी स्तर से रिपोर्टिंग करते हुए आम लोगों की आवाज को प्रमुखता से सामने लाने का कार्य किया है. इसके साथ ही वे NGO Amar Shaheed Bipin Singh Foundation से जुड़कर सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं. स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, युवा सशक्तिकरण, धार्मिक और जनकल्याण से जुड़े अभियानों में उनकी विशेष भागीदारी रही है. समाज के विभिन्न वर्गों के बीच जागरूकता फैलाने और सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयासों में वे निरंतर योगदान देते रहे हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत विवेक सिंह राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, खेल, अपराध, रियल-टाइम समाचारों, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक विषयों से जुड़ी खबरों पर लेखन करते हैं. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization), कंटेंट प्लानिंग और ट्रेंड-आधारित समाचार लेखन की अच्छी समझ है. ब्रेकिंग न्यूज की पहचान, त्वरित कवरेज और कम समय में तथ्यपरक समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यक्षमताओं में शामिल है. विवेक सिंह किसी भी समाचार को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की जांच और सत्यापन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं. वे विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करने के बाद ही समाचार प्रकाशित करते हैं, जिससे उनकी रिपोर्टिंग और लेखन में सटीकता तथा विश्वसनीयता बनी रहती है. तथ्यपरक, निष्पक्ष और भरोसेमंद पत्रकारिता में विश्वास रखने वाले विवेक सिंह पाठकों तक गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
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