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बुद्ध की शिक्षा को प्रसारित करने में महा मोग्गलान का अद्वितीय योगदान

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बुद्ध की शिक्षा को प्रसारित करने में महा मोग्गलान का अद्वितीय योगदान

राजगीऱ नव नालंदा महाविहार सम विश्वविद्यालय, नालंदा द्वारा महात्मा बुद्ध के प्रिय शिष्य धम्मसेनापति महा मोग्गल्लान के 2511वें परिनिर्वाण दिवस पर 15 वीं शांति यात्रा का आयोजन रविवार को किया गया. यह यात्रा महाविहार से जुआफरडीह स्तूप तक किया गया, जिसमें शिक्षक और छात्र बड़ी संख्या में शामिल हुये. भगवान बुद्ध की शिक्षा को प्रसारित करने में शांतिदूत व महा मोग्गलान का अद्वितीय योगदान रहा है. उन्हें विभिन्न प्रकार की अलौकिक शक्तियाँ प्राप्त थीं. चीनी यात्री ह्लेनसांग के द्वारा लिखित उपलब्ध साहित्यिक श्रोत के अनुसार जुआफरडिह स्तूप, नालंदा में ही महा मोग्गल्लान का परिनिर्वाण हुआ था. बिहार सरकार ने महा मोग्गल्लान के परिनिर्वाण दिवस को महामोग्लान दिवस के रूप में स्वीकार किया है. महा मोग्गल्लान के अभूतपूर्व योगदान व भूमिपुत्र को नमन करने के लिए नव नालंदा महाविहार महा मोग्गलान के 2497वीं परिनिर्वाण 2010 से महा मोग्गल्लान पथ प्रदक्षिणा पद यात्रा की शुरुआत की है. लगभग दो किलोमीटर के यात्रा कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत बौद्ध भिक्षुओं के मंगल पाठ से किया गया. कार्यक्रम का विषय प्रवर्तन व संचालन प्रो. राणा पुरूषोत्तम कुमार सिंह ने किया. उन्होंने जुआफरडिह स्तूप को लेकर अपने अनुभव को साझा करते हुए स्तूप के पुरातात्विक व साहित्यिक सर्वेक्षण के महत्वपूर्ण पहलुओं को बताया. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये महाविहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि नालन्दा परंपरा के वाहक महा मोग्गल्लान की जन्मभूमि है. भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों में वे एक रहे हैं. उनकी करूणा और सत्य के प्रति समर्पण अनेक लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने को प्रेरित करता है. उनकी जीवनगाथा सिखाती है कि कठिनाइयों के बीच भी सत्य और धर्म का अनुसरण कैसे किया जा सकता है. उनका परिनिर्वाण हमें आत्म-विकास और मोक्ष के पथ पर प्रेरित करता है. प्रो. सिद्धार्थ ने नव नालन्दा महाविहार द्वारा चलायी जा रही इस यात्रा की सराहना की. उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे महत्वपूर्ण स्थलों के विकास में महाविहार का योगदान हो, इसके लिए प्रयास किया जायेगा. धन्यवाद ज्ञापन बौद्ध अध्ययन विभागाध्यक्ष डॉ. मुकेश कुमार वर्मा ने किया. कार्यक्रम में महाविहार के कुलसचिव प्रो दीपंकर लामा, प्रो विश्वजीत कुमार, प्रो बिनोद कुमार चौधरी एवं आचार्य, शोधछात्र, कर्मचारी सहित ग्रामीण शामिल हुये.

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