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राजगीर में वैश्विक सम्मेलन का आयोजन

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राजगीर में वैश्विक सम्मेलन का आयोजन

राजगीर. नालंदा विश्वविद्यालय और बेंगलुरु के स्वतंत्र थिंक-टैंक सिनर्जिया फाउंडेशन द्वारा दो दिवसीय वैश्विक सम्मेलन नालंदा विश्वविद्यालय में शुक्रवार को आरंभ हुआ. यह आयोजन दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के बीच, बहुमुखी सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है. यह उच्च स्तरीय परामर्शों की एक श्रृंखला के लिए बिम्सटेक देशों के पालिसी एक्सपर्ट्स, विचारकों और सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स को एक मंच पर लाएगा. इस बात पर ध्यान देने के साथ ही रीजनल कोऑपरेशन कैसे सतत विकास को आगे बढ़ा सकता है। इस बात पर भी चर्चा सम्मेलन में की जायगी. शैक्षिक उत्कृष्टता केंद्र के रूप में नालंदा विश्वविद्यालय क्षेत्रीय सहयोग और शांति को बढ़ाने में क्या महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. 13 सितंबर को नालंदा विश्वविद्यालय द्वारा सभी डेलीगेट्स का गर्मजोशी से स्वागत किया गया. कांफ्रेंस कोर्डिनेटर डॉ. राजीव रंजन चतुर्वेदी ने यह जानकारी दी है. “इस दो दिवसीय कांफ्रेंस के दौरान सभी डेलीगेट्स और प्रतिभागी उच्च-स्तरीय संवाद में शामिल होंगे. यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल, प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेषों की यात्रा के साथ खुद को नालंदा की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत से सराबोर पाएंगे. यहां के देशी विदेशी छात्रों को बिम्सटेक सदस्य देशों के कामकाज और प्रमुख रणनीतिक मुद्दों की समझ के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त करने का अवसर प्राप्त होगा. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह सम्मेलन 14 सितंबर को बिम्सटेक देशों के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ नालंदा विश्वविद्यालय के अंतरिम कुलपति प्रो. अभय कुमार सिंह और सिनर्जिया फाउंडेशन के अध्यक्ष के मुख्य भाषण के साथ समाप्त होगा. इन सत्रों के बाद क्षेत्र के भविष्य के लिए कार्रवाई योग्य अंतर्दृष्टि उत्पन्न करने के लिए आकर्षक पैनल चर्चाएं की जाएंगी. सम्मेलन में राजदूत पंकज सरन, सदस्य, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड, भारत सरकार द्वारा एक विशेष व्याख्यान दिन का मुख्य आकर्षण होगा. क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देने और क्षेत्र को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों की समझ बढ़ाने के लिए दक्षिण पूर्व एशिया के भावी नेताओं को एक साथ लाने में नालंदा विश्वविद्यालय एक प्रमुख सूत्रधार के रूप में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है.

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