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Home बिहार बिहारशरीफ बिहार की ‘बावन बूटी साड़ी’ को मिला जीआई टैग, दुनिया भर में चमकेगी नालंदा के बुनकरों की पहचान

बिहार की ‘बावन बूटी साड़ी’ को मिला जीआई टैग, दुनिया भर में चमकेगी नालंदा के बुनकरों की पहचान

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बिहार की ‘बावन बूटी साड़ी’ को मिला जीआई टैग, दुनिया भर में चमकेगी नालंदा के बुनकरों की पहचान
सांकेतिक तस्वीर

GI Tag News : (निरंजन) नालंदा जिले की सदियों पुरानी और विश्वविख्यात हस्तकरघा कला ‘बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक’ को आखिरकार भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिल गया है. इस उपलब्धि के साथ नालंदा की पारंपरिक बुनकरी कला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान मिल गई है. नालंदा की बावन बूटी के अलावा गया जिले के पथरकट्टी स्टोन क्राफ्ट और भोजपुर की पिड़िया पेंटिंग को भी जीआई टैग प्रदान किया गया है.

नाबार्ड और बिहार सरकार के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) और बिहार सरकार के संयुक्त प्रयासों से मिली यह उपलब्धि पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय बन गई है. चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री द्वारा दी गई इस मान्यता से बावन बूटी की मौलिकता, विशिष्टता और ऐतिहासिक पहचान को कानूनी सुरक्षा प्राप्त हो गई है.

क्या है बावन बूटी कला की खासियत?

बावन बूटी कला अपनी अनूठी बुनाई शैली के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है. इस हस्तकरघा कला में कपड़े पर 52 पारंपरिक बूटियों या प्रतीकों को बेहद बारीकी से उकेरा जाता है. इनमें कमल का फूल, बोधि वृक्ष, सिंह, बैल और बौद्ध संस्कृति से जुड़े अनेक प्रतीक शामिल होते हैं. नालंदा के बसवन बिगहा और आसपास के गांव इस कला के प्रमुख केंद्र हैं, जहां पीढ़ियों से बुनकर परिवार इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं.

बुनकरों की मेहनत को मिला सम्मान

नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) अमृत बरनवाल ने इसे नालंदा के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन सैकड़ों बुनकर परिवारों की अथक मेहनत और समर्पण का परिणाम है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी इस कला को जीवित रखा. उन्होंने बताया कि जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया में वाराणसी की संस्था ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन (एचडब्ल्यूए) और पद्मश्री डॉ. रजनीकांत का तकनीकी सहयोग महत्वपूर्ण रहा.

अब नकली उत्पादों पर लगेगी रोक, बढ़ेगी बाजार में मांग

जीआई टैग मिलने के बाद बावन बूटी उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग पहचान मिलेगी। इससे स्थानीय बुनकरों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा. साथ ही नकली और मशीन निर्मित उत्पादों से इस पारंपरिक कला की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बुनकरों की आय बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे.

‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर बिहार’ को मिलेगी मजबूती

यह उपलब्धि प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान और बिहार सरकार के ‘आत्मनिर्भर बिहार’ विजन को भी मजबूती देगी. स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पाद अब वैश्विक बाजार तक पहुंच सकेंगे, जिससे नालंदा के बुनकरों को सीधा लाभ मिलेगा.

बिहार के तीन उत्पादों को एक साथ मिला सम्मान

उल्लेखनीय है कि नालंदा की बावन बूटी के साथ गया के पथरकट्टी स्टोन क्राफ्ट और भोजपुर की पिड़िया पेंटिंग को भी जीआई टैग मिला है. इससे बिहार की सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहरों को नई पहचान मिली है और राज्य की कला एवं शिल्प परंपरा को वैश्विक मंच पर सम्मान प्राप्त हुआ है.

Also Read : बिहार की तीन पारंपरिक कलाओं को मिला GI टैग, दुनिया में बढ़ेगा बावन बूटी, पत्थरकट्टी और पीढ़िया पेंटिंग का मान

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Vivek Singh : विवेक सिंह की डिजिटल मीडिया और जनसरोकारों से जुड़े विषयों में विशेष रुचि रही है. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वे बिहार के मिथिला क्षेत्र के निवासी हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं. उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई की है. शिक्षा के दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, जनसंचार, फोटो जर्नलिज्म, मोबाइल जर्नलिज्म (MOJO) और मीडिया रिसर्च की गहन समझ विकसित की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने मीडिया प्लेटफॉर्म The Newsdharma के माध्यम से ग्राउंड रिपोर्टिंग, जनमत संग्रह (Public Opinion), सामाजिक मुद्दों की कवरेज और स्थानीय समाचारों के संकलन का व्यापक अनुभव प्राप्त किया. उन्होंने विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जनहित से जुड़े विषयों पर जमीनी स्तर से रिपोर्टिंग करते हुए आम लोगों की आवाज को प्रमुखता से सामने लाने का कार्य किया है. इसके साथ ही वे NGO Amar Shaheed Bipin Singh Foundation से जुड़कर सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं. स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, युवा सशक्तिकरण, धार्मिक और जनकल्याण से जुड़े अभियानों में उनकी विशेष भागीदारी रही है. समाज के विभिन्न वर्गों के बीच जागरूकता फैलाने और सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयासों में वे निरंतर योगदान देते रहे हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत विवेक सिंह राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, खेल, अपराध, रियल-टाइम समाचारों, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक विषयों से जुड़ी खबरों पर लेखन करते हैं. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization), कंटेंट प्लानिंग और ट्रेंड-आधारित समाचार लेखन की अच्छी समझ है. ब्रेकिंग न्यूज की पहचान, त्वरित कवरेज और कम समय में तथ्यपरक समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यक्षमताओं में शामिल है. विवेक सिंह किसी भी समाचार को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की जांच और सत्यापन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं. वे विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करने के बाद ही समाचार प्रकाशित करते हैं, जिससे उनकी रिपोर्टिंग और लेखन में सटीकता तथा विश्वसनीयता बनी रहती है. तथ्यपरक, निष्पक्ष और भरोसेमंद पत्रकारिता में विश्वास रखने वाले विवेक सिंह पाठकों तक गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
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