नालंदा : मत्स्य पालन से युवाओं को मिलेगा रोजगार, सरकार दे रही 60% तक अनुदान और हैचरी योजना का लाभ

Fisheries Scheme Bihar : बिहारशरीफ में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए सरकार की कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. इसमें 60% तक अनुदान और 19 हैचरी यूनिट का लक्ष्य शामिल है.

By RANJIT SINGH | July 4, 2026 6:55 PM

Fisheries Scheme Bihar : जिले में मछली उत्पादन और उन्नत बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पूरी तरह से कमर कस ली है. मुख्यमंत्री तालाब मत्स्यिकी योजना के तहत बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक विशेष मुहिम चलाई जा रही है. इसके साथ ही, केंद्र सरकार की 16 अन्य महत्वाकांक्षी योजनाएं भी वर्तमान में मत्स्य पालकों के कल्याण के लिए प्रभावी रूप से लागू हैं. इसी कड़ी में जिला मत्स्य विभाग द्वारा ‘उन्नत मत्स्य बीज उत्पादन योजना’ का संचालन किया जा रहा है.

19 हैचरी स्थापित करने का लक्ष्य

चालू वित्तीय वर्ष में पूरे जिले में कुल 19 यूनिट मत्स्य बीज हैचरी स्थापित करने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है. सामाजिक समीकरणों के आधार पर इसमें सामान्य वर्ग के लिए 8 यूनिट, अनुसूचित जाति (SC) के लिए 3 यूनिट और पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 8 यूनिट लगाने का विशेष प्रावधान किया गया है.

Nalanda News : अब दूसरे राज्यों पर निर्भरता होगी कम

विभाग द्वारा तय की गई इकाई (यूनिट) लागत पर सामान्य वर्ग के लाभुकों को 50 प्रतिशत, जबकि अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग से आने वाले मत्स्य पालकों को 60 प्रतिशत तक का भारी अनुदान (सब्सिडी) दिया जाएगा. इस योजना के धरातल पर उतरने से जिले के मछली पालकों को आसानी से उच्च गुणवत्तापूर्ण बीज बेहद सस्ती दरों पर स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेगा. वर्तमान में स्थानीय मत्स्य पालकों को दूसरे प्रदेशों से काफी ऊंची कीमतों पर बीज मंगाना पड़ता है.

एरिएटर पर भी मिलेगा अनुदान

इसके अतिरिक्त, मत्स्य पालकों को उनके तालाबों में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने के लिए आधुनिक ‘यांत्रिक एरिएटर’ भी सरकारी अनुदान पर उपलब्ध कराया जाएगा. इसके तहत सामान्य वर्ग के 4, अनुसूचित जाति के 1 और पिछड़ा वर्ग के 3 मत्स्य पालकों को लाभान्वित किया जाएगा. इस एक एरिएटर यूनिट की अनुमानित लागत करीब 1.20 लाख रुपये है.

क्या कहते हैं जिला मत्स्य पदाधिकारी

इस महत्वाकांक्षी योजना के संबंध में जिला मत्स्य पदाधिकारी शंभू कुमार ने बताया कि जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय बेरोजगार युवाओं को इस क्षेत्र से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का यह एक सुनहरा अवसर है. सरकार द्वारा कई कल्याणकारी और लाभकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका सही समय पर लाभ उठाकर युवा वर्ग ग्रामीण स्तर पर ही अपनी एक बेहतरीन और अच्छी आय कर सकते हैं.

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