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मनसा मेले में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

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मनसा मेले में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

परवलपुर. अगहन पंचमी के अवसर पर सोमवार को प्रखंड के पिलिच गांव में लगने वाली मनसा मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है. पूरा मेला परिसर में एवं आसपास का इलाका श्रद्धालुओं की भीड़ से पट गया है. सोमवार की अर्द्ध रात्रि के बाद शुरू होने वाले बलि प्रदान करने के लिए बड़ी संख्या में दूर दराज से भी भक्त यहां पहुंच गए हैं. प्रत्येक वर्ष अगहन पंचमी को यहां वार्षिक मेले का आयोजन होता है जो अगले दिन तक चलता है. इस दो दिवसीय मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से मनसा देवी की आराधना करने वालों की मुरादे मां अवश्य पूरी करती है. मेले में पहुंचे श्रद्धालु पाठ एवं कबूतरों की बली चढ़कर अपनी मनौतिया उतारते हैं. इस मेले में नालंदा के पड़ोसी जिले के साथ-साथ दूसरे जिले एवं कई राज्यों के श्रद्धालु पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं. इसमें झारखंड यूपी एमपी छत्तीसगढ़ दिल्ली के प्रवासी एवं अप्रवासी भी शामिल हैं. उनमें काफी संख्या में जनप्रतिनिधि कारोबारी तथा अन्य दूसरे वीआईपी भी अच्छी खासी संख्या में देवी दर्शन को पहुंचे हैं. पिलीच एवं पड़ोसी दर्जन भर गांव में लगभग सभी घर अतिथियों से गुलजार है. यह सभी अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद अपनी मनौतिया उतारने पहुंचे हैं. इसके साथ ही वैसे लोगों की संख्या भी काफी होती है जो मेला में मनसा देवी से अपनी मन्नतें पूरी होने की आस लेकर पहुंचते हैं. सोमवार की देर रात्रि तक सैकड़ो की संख्या में निजी एवं सार्वजनिक वाहनों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा. वाहनों की आवाजाही से बड़ीमठ- पिलीच मार्ग में आपाधापी मची रही। शाम होते-होते समूचा मेला परिसर श्रद्धालुओं से ठसाठस भर चुका है. मनसा देवी की प्रसिद्धि कहें अथवा भक्तों का अटूट विश्वास मेले में पहुंचे लोग सारे कष्ट सहकर भी पूरी रात मां की पूजा एवं अपनी मनौती उतारने के लिए इंतजार में गुजारते हैं. इसके पूर्व यहां तीन दिन से ही देवी का पाठ चलता रहता है. पंचमी के दिन शाम को कुमारी कन्याओं को जमाने के बाद शुरू होता है. अर्धरात्रि के बाद बलि प्रदान करने का सिलसिला और यह दूसरे दिन यानी मंगलवार तक चलती है. मनसा देवी की प्रसिद्ध जितने कम समय में चारों ओर फैली है वह किसी या अचंभे से कम नहीं है. मात्र 30-35 वर्षों में ही इस मेले की ख्याति अपनी सीमाओं को लांघ चुकी है. इतने कम समय में मनसा देवी के प्रसिद्ध आसपास के इलाकों से ऊपर उठकर पड़ोसी राज्यों तक जा पहुंची है. प्रत्येक मंगलवार को यहां भक्तों की अच्छी खासी भीड़ रहती है. पर अगहन पंचमी के वार्षिक मेले की बात ही निराली है. दो दिवसीय मेले में पिलीच का माहौल बड़गांव तथा अंगारी छठ मेले से कम नहीं रहता है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस दिन डेढ़ से दो हजार पाठा एवं कबूतरों की बलि चढ़ाई जाती है. इसके अलावा भी हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ यहां उमड़ी है. इस मंदिर का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है. लगभग 35 वर्ष पूर्व 1989 में ही इसकी आधारशिला अगहन पंचमी के दिन रखी गई थी. पिलीच गांव के ही साधु शरण प्रसाद को देवघर के संत से मंदिर निर्माण की प्रेरणा मिली थी. तब मात्र एक पिंडी के रूप में इसका निर्माण किया गया था. इस पिंडी के जल को धोकर सांप एवं बिच्छू सहित अन्य जहरीला जीव के काटने पर पीड़ित मरीजों को पिलाया जाता था जिसके बाद मरीज भला चंगा होकर अपने घर लौट जाता है. आज भी या मान्यता चली आ रही है. धीरे-धीरे यहां लोगों की भीड़ जुटने लगी तथा प्रत्येक मंगलवार को यहां मेला लगने लगा. बाद में देखते ही देखते इसकी प्रसिद्धि दिन दूनी रात चौगुनी की रफ्तार से फैली. संतान एवं पुत्र रत्न की प्राप्ति से लेकर नौकरी तथा दूसरे अन्य कार्य सिद्ध होने की आस में लोग देवी मनसा की दरबार में हाजिरी लगाने आते हैं. मेला को देखते हुए सुरक्षा के दृष्टिकोण से यहाँ भारी पुलिस बल को लगाया गया है. मेला में हिलसा एसडीपीओ की मौजूदगी में कयी थानों की पुलिस गश्त कर रही है.

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