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देश में चले स्वच्छता साथ पवित्रता अभियान : मोरारी बापू

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देश में चले स्वच्छता साथ पवित्रता अभियान : मोरारी बापू

राजगीर. सर्व धर्म समभाव की धरती राजगीर से सुप्रसिद्ध कथा वाचक मोरारी बापू ने देश में स्वच्छता के साथ पवित्रता का अभियान चलाने का आवाहन किया है. उन्होंने कहा कि देश को जितनी स्वच्छता की आवश्यकता है, उतनी ही पवित्रता की. पंच पहाड़ियों से आच्छादित राजगीर के आरआईसीसी में आयोजित नौ दिवसीय राम कथा के शुभारंभ कार्यक्रम में मोरारी बापू ने शनिवार को यह कहा. नालंद ददाति इति नालंदा की व्याख्या करते हुए पूज्य मोरारी बापू ने कहा कि जगत में विश्वविद्यालय अनेकों हैं लेकिन नालंदा सरिखा कोई नहीं। उन्होंने कहा कि इस विद्या भूमि को वे प्रणाम करने आए हैं. नालंदा विश्वविद्यालय में स्वाध्याय करने आये हैं. पहले स्वाध्याय फिर प्रवचन होगा. उन्होंने कहा 800 साल बाद नालंदा विश्वविद्यालय फिर से पुनर्जीवित हो गया है. प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की महिमा की चर्चा करते हुए पूज्य बापू ने कहा कि नालंदा विद्या की आदि भूमि है. यह बुद्ध और तीर्थंकर की कर्मभूमि है. उन्हें प्रसन्नता है कि इस विद्या भूमि को प्रणाम करने आये हैं. उन्होंने कहा नालंदा विश्वविद्यालय में तीन खंड में विशाल पुस्तकालय रत्न सागर, रतनोदधि और रत्नरंजिका में अततायियों द्वारा आग लगा दी गई थी, जो 6 महीने तक जलता रहा था. उन्होंने कहा धर्म साधना की आग कभी नहीं बुझेगी. मोरारी बापू ने कहा कि भगवान बुद्ध के दो प्रिय शिष्य सारीपुत्र और महामोग्लान इसी नालंदा के निवासी थे. तीर्थंकर महावीर कि यह प्रथम देशनास्थली रही है. राजगीर तपस्वियों की भूमि है. नालंदा विश्वविद्यालय सहित विदेशी विश्वविद्यालयों की चर्चा करते हुए बापू ने कहा कि मानस के अनुसार प्राचीन काल में नौ विश्वविद्यालय थे। उस समय के गुरुकुल को विश्वविद्यालय समान दर्जा था. उनमें महर्षि वशिष्ठ गुरुकुल, महर्षि विश्वामित्र गुरुकुल, महर्षि परशुराम गुरुकुल, प्रयागराज में महर्षि भारद्वाज गुरुकुल, महर्षि गौतम गुरुकुल, महर्षि वाल्मीकि गुरुकुल, महर्षि कुंबज गुरुकुल और महाकाल की नगरी में उज्जैन गुरुकुल को उन्होंने उस समय का विश्वविद्यालय बताया. मोरारी बापू ने कहा कि राजगीर की पवित्र भूमि और नालंदा विश्वविद्यालय के विचारों की ध्वजा की गूंज सर्वत्र सुनाई पड़ रही है. उन्होंने कहा नालंदा विश्वविद्यालय में भले ही शिक्षकों और छात्रों की संख्या काम है लेकिन नालंदा की दिव्या भूमि पर इस विश्वविद्यालय का निर्माण होना अपने आप में सौभाग्य की बात है. उन्होंने कहा कथा कहां होनी है मुरारी बापू नहीं चुनते हैं कथा स्वयं अपना स्थान चुनती है. राजगीर को कल्याण भूमि बताते हुए उन्होंने कहा बिहार मां जानकी की भूमि है. विभिन्न विश्वविद्यालयों से आये कुलपतियों, आचार्यों, विभिन्न संप्रदाय के धर्माचार्यों और सिंदूरी भारत की राजपीठ के प्रति पूज्य बापू ने आभार प्रकट किया. बापू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी कहते हैं कि उनके शरीर में खून नहीं सिंदूर बह रहा है. यह सिंदूर हनुमान जी के प्रतीक है. सिंदूर माता और बहनों की सुहाग है. उन्होंने कहा यह सिंदरी भारत है. केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने राजगीर को आदर्श स्थल बताते हुए कहा कि बापू के फॉलोअर नहीं बल्कि फ्लावर हैं. उन्होंने कहा 21वीं सदी भारत का होगा. स्वामी विवेकानंद ने यह घोषणा सैकड़ों साल पहले किया था. सत्य, प्रेम और करुणा सबके लिए होना चाहिए. भारत के प्रकृति की बात करते हुए उन्होंने बापू के करुणा की चर्चा ओ. उन्होंने कहा सदियों से सनातन पर प्रहार हो रहा है.उसे श्रीकृष्ण के शस्त्र से नहीं, शबरी के झूठे बेर से जीता जा सकता है.उन्होंने कहा भारत वैचारिक लड़ाई एक के बाद एक जीत रहा है. सत्संग सहानुभूति नहीं सामर्थ और साहस देता है. यह देश संतों और विचारवानों का है.दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि राम कथा व्यक्ति निर्माण का माध्यम है. जीवन में कभी भूल भटकाव हो तो राम कथा ध्रुवतारा की तरह काम करता है. इस अवसर पर विरायतन की मुख्य संरक्षिका साध्वी डॉ. संप्रज्ञा जी महाराज, सरदार हरभजन सिंह, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. रमेश प्रसाद सिंह परिहार, स्वामी केशवानंद, ब्रह्मचारी बालानंद, सांसद कौशलेन्द्र कुमार सहित दर्जनों प्रमुख लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए.

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