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Home बिहार बिहारशरीफ पीएमसीएच के बाद अब नालंदा के अस्पतालों पर निगरानी की मांग, अस्पतालों की कार्यशैली पर सवाल

पीएमसीएच के बाद अब नालंदा के अस्पतालों पर निगरानी की मांग, अस्पतालों की कार्यशैली पर सवाल

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पीएमसीएच के बाद अब नालंदा के अस्पतालों पर निगरानी की मांग, अस्पतालों की कार्यशैली पर सवाल
अस्पताल की तस्वीर

बिहारशरीफ से कंचन कुमार की रिपोर्ट
Bihar Sharif News : सूबे के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार द्वारा हाल ही में पीएमसीएच (PMCH) में किए गए औचक निरीक्षण और उसके बाद की गई बड़ी कार्रवाई का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि अब नालंदा जिले में भी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की जांच की मांग तेज हो गई है. नालंदा के जागरूक नागरिकों और ग्रामीणों ने पावापुरी आयुर्वेदिक अस्पताल-सह-कॉलेज, भागनबिगहा दंत कॉलेज-सह-अस्पताल और बिहारशरीफ स्थित जिला मॉडल अस्पताल के औचक निरीक्षण की मांग शुरू कर दी है.

करोड़ों की लागत से बने अस्पताल, फिर भी इलाज को तरसते मरीज

सोशल मीडिया से लेकर गांव-देहात के चौक-चौराहों तक, हर जगह स्वास्थ्य मंत्री से नालंदा आने की अपील की जा रही है. भव्य इमारतें और भारी-भरकम स्टाफ, फिर भी मरीज बेहाल स्थानीय ग्रामीण रामजी महतो, शिव महतो और रामअवतार प्रसाद सहित कई लोगों का कहना है कि पावापुरी, भागनबिगहा और बिहारशरीफ समेत अनुमंडल से लेकर प्रखंड स्तर तक सरकार ने करोड़ों की लागत से भव्य अस्पताल भवनों का निर्माण कराया है.

इंटर्न्स के भरोसे चल रहे अस्पताल, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप

यहां दर्जनों डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती भी की गई है. इसके बावजूद, पावापुरी आयुर्वेदिक अस्पताल और भागनबिगहा दंत अस्पताल से अधिकांश वरीय (सीनियर) डॉक्टर और अधिकारी अक्सर गायब रहते हैं. इंटर्न्स के भरोसे अस्पताल, निजी क्लीनिकों को फायदा पहुँचाने का खेल ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि इन बड़े अस्पतालों की कमान अधिकांशतः प्रशिक्षु मेडिकल छात्रों (इंटर्न्स) और कनिष्ठ कर्मचारियों के भरोसे रहती है. जब भी कोई गंभीर मरीज यहाँ इलाज के लिए आता है, तो उसे बहला-फुसलाकर या डराकर गायब रहने वाले उन्हीं वरीय डॉक्टरों के निजी क्लीनिकों में जाने की सलाह दे दी जाती है.

नालंदा में स्वास्थ्य तंत्र की जांच की मांग

स्थानीय लोगों के अनुसार, पावापुरी में पदस्थापित अधिकांश प्राध्यापक-सह-डॉक्टर (प्रोफेसर डॉक्टर्स) अस्पताल से गायब रहकर बिहारशरीफ शहर में अपने निजी क्लीनिक धड़ल्ले से चला रहे हैं. यही कारण है कि अब इन डॉक्टरों की कार्यशैली की गुप्त जांच और अस्पतालों में औचक निरीक्षण करने की मांग जिला स्तर पर जोर पकड़ चुकी है. स्वास्थ्य मंत्री से मिलने की तैयारी में जुटे जिले के युवा अस्पतालों की इस बदहाली और डॉक्टरों की मनमानी से तंग आकर जिले के कुछ युवाओं ने अब सीधे पटना का रुख करने का फैसला किया है.

क्षेत्रीय नेताओं से संपर्क साधकर युवाओं ने तेज की पहल

इसके लिए युवाओं की टोली क्षेत्रीय नेताओं से संपर्क साध रही है, ताकि स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार से मिलकर उन्हें नालंदा की स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत से रूबरू कराया जा सके और उनसे खुद आकर औचक निरीक्षण करने का आग्रह किया जा सके.

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