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Home बिहार बिहारशरीफ 5 लाख रुपये की बर्बादी का जिम्मेदार कौन? राजगीर नगर परिषद ने चबूतरा बनवाया, मलमास मेला के बाद पुरातत्व विभाग ने ढहाया

5 लाख रुपये की बर्बादी का जिम्मेदार कौन? राजगीर नगर परिषद ने चबूतरा बनवाया, मलमास मेला के बाद पुरातत्व विभाग ने ढहाया

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5 लाख रुपये की बर्बादी का जिम्मेदार कौन? राजगीर नगर परिषद ने चबूतरा बनवाया, मलमास मेला के बाद पुरातत्व विभाग ने ढहाया
टूटे चबूतरे की तस्वीर

नालंदा (बिहारशरीफ) से रामविलास की रिपोर्ट
Bihar Sharif News : राजगीर नगर परिषद की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. राजगीर में मलमास मेला से पहले करीब पांच लाख रुपये की लागत से बनाये गये चबूतरे को मेला समाप्त होने के महज एक पखवाड़े बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने अवैध बताते हुए ध्वस्त करा दिया है. इस कार्रवाई ने सरकारी धन के उपयोग, विभागीय समन्वय और अधिकारियों की जवाबदेही पर नई बहस छेड़ दी है. मामला राजगीर के पुरातात्विक धरोहर अजातशत्रु किला मैदान की संरक्षित एवं प्रतिबंधित क्षेत्र का है, जहां बिना अनुमति निर्माण कराये जाने का गंभीर आरोप है.

बिना अनुमति निर्माण पर एएसआई का एक्शन

सूत्रों के अनुसार नगर परिषद द्वारा मलमास मेला के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के नाम पर अजातशत्रु किला के दक्षिणी चहारदीवारी के समीप चबूतरे का निर्माण कराया था. शुक्रवार को एएसआई के संरक्षण सहायक (सीएम) के नेतृत्व में पहुंची टीम ने मजदूरों की मदद से पूरे निर्माण को ध्वस्त कर दिया. पुरातत्व विभाग का स्पष्ट कहना है कि संरक्षित क्षेत्र में किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण बिना पूर्व अनुमति कराना कानून का उल्लंघन है. ऐसे में अवैध निर्माण को हटाना आवश्यक है. विभागीय दावा है कि निर्माण कार्य शुरू होने के दौरान ही एएसआई ने नगर परिषद को मौखिक और लिखित दोनों माध्यमों से आपत्ति दर्ज कराते हुए काम रोकने का अनुरोध किया था. इसके बावजूद निर्माण जारी रखा गया.

प्रतिबंधित क्षेत्र में किसके आदेश पर हुआ निर्माण, जांच की उठी मांग

लाखों रुपये खर्च कर चबूतरा तैयार कर दिया गया. अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब संबंधित विभाग पहले ही आपत्ति जता चुका था तो आखिर किसके आदेश पर प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण कराया गया. सरकारी राशि क्यों खर्च की गई. घटना के बाद विपक्षी जनप्रतिनिधियों ने भी नगर परिषद की कार्यशैली पर तीखे सवाल उठाये हैं. वार्ड पार्षद डॉ. अनिल कुमार ने इसे केवल अवैध निर्माण का मामला नहीं बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण बताया. उन्होंने जिला पदाधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, निर्माण की स्वीकृति देने वाले अधिकारियों की पहचान करने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है.

पहले 10 लाख का फव्वारा पार्क टूटा, अब 5 लाख का चबूतरा ध्वस्त

उनका कहना है कि यदि जिम्मेदारी तय नहीं की गई तो भविष्य में भी इसी तरह सरकारी धन बर्बाद होता रहेगा। जानकार बताते हैं कि यह पहला अवसर नहीं है जब नगर परिषद का निर्माण कार्य एएसआई की आपत्ति के कारण विवादों में आया है. इससे पहले अजातशत्रु स्तूप के समीप मलमास मेला सैरात भूमि पर करीब दस लाख रुपये की लागत से वाटर फव्वारा पार्क बनाया गया था. मलमास मेला के पहले तत्कालीन जिलाधिकारी कुंदन कुमार के निर्देश पर उसे ध्वस्त कर दिया गया था.

नगर परिषद की कार्यशैली पर फिर उठे सवाल

उस परियोजना का भुगतान भी नगर परिषद द्वारा किया जा चुका था. उस समय भी एएसआई ने राजगीर थाना में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी. लगातार दूसरी बार संरक्षित क्षेत्र में बिना अनुमति निर्माण और बाद में ध्वस्तीकरण की घटना ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण के लिए अनुमति नहीं थी तो काम शुरू ही क्यों कराया गया. यदि अनुमति थी तो ध्वस्तीकरण की नौबत क्यों आई.

सरकारी धन की बर्बादी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की मांग

शहर में अब यह चर्चा तेज है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में विभागीय समन्वय का अभाव है या नियमों की अनदेखी कर मनमाने ढंग से कार्य कराया जा रहा है. नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा सरकारी धन की बर्बादी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की मांग डीएम से की है.

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