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शहर में बेखौफ दौड़ रहे 15 वर्ष पुराने वाहन

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शहर में बेखौफ दौड़ रहे 15 वर्ष पुराने वाहन

बिहारशरीफ.

शहर में फिटनेश फेल वर्षों पुराने वाहन बेखौफ दौड़ रहे हैं. चौक-चौराहों पर साइलेंसर से धुआं उगलते और तेज आवाज करते सैकड़ों वाहन घूमते नजर आ रहे हैं. इंजन खराब हालत के बावजूद जैसे – तैसे ऐसे वाहनों को चलाया जा रहा है. इनमें छोटे से लेकर भारी वाहन तक हैं. ऐसे वाहन हादसों को आमंत्रित दे रहे हैं. 15 से 20 साल पुराने वाहनों में भी यात्रियों को रोजाना ढोया जा रहा है. बहुत से स्कूली बच्चों में भी इसे पुराने वाहन खपाये जा रहे हैं. इसके अलावा जर्जर हो चुके ट्रकों में भी खूब माल की ढुलाई चल रही है. ऐसे वाहनों के लिए जुगाड़ से फिटनेस प्रमाणपत्र भी मिल जा रहे हैं. बहुत से फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं होने पर भी ऐसे वाहन सरपट दौड़ रहे हैं. बताया जाता है कि 28 नवंबर 2016 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने आदेश दिया था कि डीजल से चलने वाले 10 व पेट्रोल से चलाये जाने वाले 15 साल पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगाया जाये. वायु की गुणवत्ता के लिए ऐसा किया गया है. इसी के चलते डीजल से 10 और पेट्रोल से चलने वाले 15 साल से अधिक पुराने वाहनों के संचालन पर सरकारी स्तर से पूरी तरह रोक लगायी गयी है. बावजूद बेरोक-टोक यह वाहन सडकों पर दौड़ रहे हैं. आरटीओ में वाहन फिटनेस के दौरान बड़े और छोटे वाहनों के इंजन, सस्पेंसन, स्टीयरिंग, ब्रेक, प्रदूषण स्तर, बैक लाइट, फॉग लाइट, हेड लाइट, पार्किंग लाइट, हार्न, साइलेंसर, चक्के, स्पीड गवर्नर व सेफ्टी ग्लासेज की जांच की जाती है. इसके बाद वाहन के सर्टिफिकेट जारी होते है. वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में जुगाड़ वाहन धड़ल्ले से चल रहे हैं. जबकि परिवहन विभाग ने इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है. प्रतिबंध के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर ट्राली और जुगाड़ वाहन दिख जाते हैं. जुगाड़ वाहनों में ट्रैक्टर, ट्राली, जीप और टैक्सी आदि शामिल हैं, जिन्हें खेती कार्य में उपयोग आने वाले डीजल इंजन से जोड़कर बनाया जाता है. ऐसे जुगाड़ वाहन बेहद खतरनाक होते हैं और दुर्घटना की आशंका सर्वाधिक होती है. जुगाड़ वाहन माल ढोने में तेजी से उपयोग हो रहे हैं. सस्ते दर पर यह माल ढोने का काम करते हैं. इसलिए गांव समेत शहर के आस-पास के क्षेत्रों में खूब जुगाड़ वाहन दौड़ते हैं. इसमें ब्रेक और वाहन की वजन के हिसाब से अव्यवस्थित होते हैं, जिसके कारण यह दुर्घटनाग्रस्त भी बहुत होे हैं.

कामर्शियल रूप में खप रहे हैं खराब वाहन :

शहर में इधर कुछ वर्षों से पुराने वाहनों की संख्या में तेजी से इजाफा हुई है. महानगरों से हटाये गये या प्रतिबंधित वाहनों यहां के सड़कों पर खराटा भरते देखे जाते हैं. कुछ कारोबारी महानगरों से सस्ते दाम पर महानगरों से खरीद पुराने वाहन लाते हैं और उसमें कुछ मरम्मत व रंगरोगन कर अच्छी मुनाफा में बेच देते हैं, जो नये वाहनों से 60 से 80 प्रतिशत सस्ते होते हैं. एक वर्ग शौक व सस्ते के कारण ऐसे पुराने वाहन खरीद कर कुछ साल चलाते हैं. ज्यादा कंडम होने लगता है तो उसे कामर्शियल रूप में उपयोग करने लगते हैं. शहर के चौक-चौराहों पर ऐसे कंडम वाहनों में फूड सामग्रियां, फास्ट फूड, ठंडा पेय, चलंत कपड़ा दुकान, पानी डब्बा वितरण, दूध वितरण, स्कूल वाहन, एंबुलेंस जैसे कामर्शियल कार्य में पुराने वाहन का प्रयोग करने लगते हैं. ऐसे कामर्शियल कार्य में उपयोग होने वाले पुराने वाहनों की प्रशासनिक स्तर पर जांच भी कम होते हैं.

15 साल पुरानी गाड़ी को टेस्ट और फीस बाद मिलते हैं फिटनेस :

15 साल पुरानी गाड़ी को लेकर नियम और कानून की बात करें तो इतनी पुरानी गाड़ी को नहीं चला सकते हैं. 15 साल पुरानी गाड़ी की फिटनेस खत्म हो जाती है. 15 साल पुरानी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन रिन्यू करवाने के लिए आपको फीस देनी होगी. इसके अलावा आपकी पुरानी गाड़ी को फिटनेस टेस्ट से भी गुजरना होगा. अगर आपकी गाड़ी फिटनेस टेस्ट पास नहीं करती है, तो रजिस्ट्रेशन और फिटनेस रीन्यू नहीं होगा. आमतौर पर पुरानी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन और फिटनेस 5 साल के लिए रीन्यू किया जाता है. पांच साल तक अपनी पुरानी गाड़ी को पहले की तरह चला सकते हैं. अगर कमर्शियल गाड़ी है, तो टैक्सी या कैब के तौर भी गाड़ी चला सकते हैं. प्राइवेट गाड़ी को टैक्सी या कैब में चलाना है, तो पहले प्राइवेट गाड़ी को कमर्शियल गाड़ी में तब्दील करना होगा.

क्या कहते हैं अधिकारी15 वर्ष पुराने वाहनों को फिटनेस टेस्ट व फीस जमा करने के बाद पांच साल के लिए रजिस्ट्रेशन और फिटनेस रीन्यू किया जाता है. समय -समय जांच की जाती है, जिसमें बिना रजिस्ट्रेशन व फिटनेस फेल वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है. अधिक प्रदूषण फैलाने वाले जुगाड़ा वाहनों को चिह्नित कर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है. पुराने वाहन खरीद-बिक्री करने वाले के खिलाफ कार्रवाई से संबंधित उनके विभाग में कोई प्रावधान नहीं है.

अनील कुमार दास, जिला परिवहन पदाधिकारी, नालंदा

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