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Home Rajya बिहार Bihar: घने जंगलों के बीच बना है यह अलौकिक मंदिर, सिर्फ देश हीं नहीं विदेश से भी आते हैं जैन धर्मावलंबी, जानें इतिहास…

Bihar: घने जंगलों के बीच बना है यह अलौकिक मंदिर, सिर्फ देश हीं नहीं विदेश से भी आते हैं जैन धर्मावलंबी, जानें इतिहास…

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Bihar: घने जंगलों के बीच बना है यह अलौकिक मंदिर, सिर्फ देश हीं नहीं विदेश से भी आते हैं जैन धर्मावलंबी, जानें इतिहास…
जमुई जैन मंदिर ...

Bihar Tourism: जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म 599 ईसा पूर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ था. काल गणना के अनुसार सोमवार, दिनांक 27 मार्च, 598 ईसा पूर्व उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र की प्रभात बेला में बिहार राज्य में वैशाली के गणनायक राजा इक्ष्वाकु वंशीय लिच्छिवी वंश के महाराज श्री सिद्धार्थ और माता त्रिशिला देवी के यहां भगवान महावीर जन्में थे. यह जगह वर्तमान में जमुई जिले के खैरा प्रखंड क्षेत्र के हड़खाड़ पंचायत अंतर्गत राजला गांव में स्थित है.

महावीर जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान आदिनाथ की परंपरा में 24वें तीर्थंकर हुए थे. इनका जीवन काल 511 से 527 ईस्वी ईसा पूर्व तक माना जाता है. तीस वर्ष की उम्र में उन्होंने घर-बार छोड़ कठोर तपस्या द्वारा कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया.

महावीर ने पार्श्वनाथ के आरंभ किए तत्वज्ञान को परिभाषित कर जैन दर्शन को स्थाई आधार दिया. वर्तमान में जमुई जिले के कुंडग्राम में भगवान महावीर का भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है.

चोरी हो गई थी 26 सौ साल पुरानी भगवान की प्रतिमा

इस मंदिर में स्थापित 26 सौ साल पुरानी भगवान महावीर की प्रतिमा 27 नवंबर 2015 को चोरी हो गई थी. भारत के साथ-साथ दुनियाभर के जैन धर्मावलंबियों की आस्था पर गहरा आघात पहुंचा था. काफी प्रयास के बाद 6 दिसंबर 2015 को प्रतिमा बरामद कर ली गई थी. इसके बाद 3 साल तक भगवान महावीर की प्रतिमा को लछुआड़ में रखा गया था और यहां भव्य मंदिर का निर्माण किया गया.

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अपने आराध्य के दर्शन करने विदेश से भी आते हैं श्रद्धालु

खैरा प्रखंड क्षेत्र के क्षत्रिय कुंड (जन्मस्थान) जैन धर्म के श्वेतांबर मानने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ा तीर्थ स्थल के समान है. यहां हर साल ज्यादातर गुजरात के अहमदाबाद, सूरत इत्यादि जगहों से जैन श्रद्धालु आते हैं. इसके अलावा मुंबई, नागपुर, कोलकाता, ऑस्ट्रेलिया सहित देश-विदेश से आए हजारों जैन श्रद्धालु यहां अपने आराध्य के दर्शन करने आते हैं.

वन्य क्षेत्र के बीचों-बीच अवस्थित है मंदिर

यह मंदिर गिद्धेश्वर वन्य क्षेत्र के बीचों-बीच अवस्थित है और पहाड़ की चोटी पर बना हुआ है. घने जंगलों के बीच बना यह मंदिर अलौकिक सुंदरता के साथ स्थापित किया गया है. जहां बैठकर आप धर्म के साथ-साथ शांति का भी अनुभव कर सकते हैं और यही कारण है कि जैन धर्म उपलब्धियां के साथ-साथ अन्य लोगों को भी यह अपनी ओर आकर्षित करता है. यहां लोग दूर-दराज से भगवान महावीर के दर्शन करने आते हैं.

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अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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