बिहार में जमीन रजिस्ट्री के क्यों बदले नियम? अब हाईटेक हो रही जांच

Bihar Land Registry: बिहार सरकार जमीन रजिस्ट्री के लिए नया नियम लाई है. जमीन से जुड़े लगभग सभी काम हाईटेक तरीके से होंगे. पारदर्शी तरीके से जांच की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी. सरकार की इस नई व्यवस्था से किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं होने की संभावना जताई जा रही है.

By Preeti Dayal | May 11, 2026 9:33 AM

Bihar Land Registry: बिहार में जमीन रजिस्ट्री के नियम अब हाईटेक हो रहे हैं. 15 मई से लागू होने वाले नए नियम के तहत अब कोई भी व्यक्ति जमीन खरीदने से पहले उसकी असली स्थिति जान सकेगा. जमीन से जुड़ी पूरी जानकारी अंचल अधिकारी या राजस्व अधिकारी के 10 दिनों के अंदर देनी होगी.

बिहार में जमीन रजिस्ट्री के नियम बदलने की वजह

पहली वजह- अक्सर देखा जाता है कि लोग ऐसी जमीन बेच देते हैं, जिस पर पहले से बैंक लोन होता है, पारिवारिक विवाद चल रहा होता है या फिर वह सरकारी जमीन होती है. सरकार की इस नई व्यवस्था से अब ऐसी गड़बड़ी नहीं हो सकेगी. इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर जमीन माफिया और बिचौलियों पर पड़ेगा.

दूसरी वजह- अब तक खरीदार को पूरी तरह से जमीन बेचने वाले की बात पर भरोसा करना पड़ता था, लेकिन अब सरकारी रिकॉर्ड 10 दिन में दूध का दूध और पानी का पानी कर देगा. अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से राज्य में जमीन विवाद के मामलों में भारी कमी आएगी और आम जनता का पैसा सुरक्षित रहेगा.

सीओ और राजस्व अधिकारियों को दी जा रही ट्रेनिंग

इस तरह से बिचौलियों और फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के उद्देश्य से नई व्यवस्था अपनाई जा रही है. जानकारी के मुताबिक, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग इस योजना को अंतिम रूप दे रहा है. सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार ने अपने ‘सात निश्चय-3’ (सबका सम्मान, जीवन आसान) मिशन के तहत यह फैसला लिया है. इसके लिए सभी अंचल अधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को विशेष ट्रेनिंग भी दी जा रही है ताकि वे समय पर रिपोर्ट दे सकें.

अब होगी हाईटेक जांच

जानकारी के मुताबिक, अब सिर्फ कागजों पर ही नहीं, बल्कि जमीन की असलियत जांचने के लिए सरकार जीआईएस तकनीक (सैटेलाइट मैपिंग) और स्थल निरीक्षण (मौके पर जाकर जांच) को भी अनिवार्य कर रही है. रजिस्ट्रेशन के दौरान कई बार लोग जमीन की गलत श्रेणी (जैसे कमर्शियल को खेती की जमीन बताकर) या कम एरिया दिखाकर सरकार को चूना लगाते हैं. अब रजिस्ट्री से पहले डॉक्यूमेंट्स की जांच और जमीन का फिजिकल वेरिफिकेशन होगा. इससे सरकार को उचित राजस्व मिलेगा और खरीदार को सही माप की जमीन मिल सकेगी.

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