बिहार में जमीन रजिस्ट्री का नया नियम लागू, अब भूखंड पर जाकर खिंचवानी होगी फोटो, जानें नियम

Bihar Land Registry Process: बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. भोजपुर के शाहपुर अंचल के 9 महत्वपूर्ण मौजों में अब फोटोग्राफी आधारित निबंधन व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है. इसके तहत जमीन की रजिस्ट्री से पहले खरीदार, विक्रेता और निबंधन कर्मी को प्लॉट पर जाकर फोटो खिंचवानी होगी.

By Paritosh Shahi | June 19, 2026 4:39 PM

Bihar Land Registry Process: बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक नया नियम लागू किया है. अब शाहपुर के 9 खास मौजों में जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले खरीदार और बेचने वाले दोनों को उस प्लॉट पर जाना होगा. वहां रजिस्ट्री ऑफिस के अधिकृत कर्मचारी के साथ मौके पर खड़े होकर फोटो खिंचवानी होगी. इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही जमीन की रजिस्ट्री हो पाएगी. आपको बता दें कि शाहपुर नगर पंचायत में यह व्यवस्था पहले से ही लागू है.

इन 9 मौजों में लागू हुई नई व्यवस्था

जगदीशपुर अवर निबंधन कार्यालय के जानकारों के अनुसार, शाहपुर अंचल के जिन गांवों को इस नए नियम के दायरे में लाया गया है, उनमें करनामेपुर, सहजौली पंचायत का मिश्रवलिया व लिलारी मौजा, बिलौटी, रंदाडीह, सेमरिया, हरिहरपुर और झौवां मौजा शामिल हैं. इन इलाकों में प्रॉपर्टी का काम बहुत बड़े पैमाने पर होता है, जिसे देखते हुए सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है.

आसमान छू रहे हैं जमीनों के दाम

इस इलाके में जमीन की मांग और कीमतें बहुत तेजी से बढ़ रही हैं. करनामेपुर बाजार अब दियारा क्षेत्र का सबसे बड़ा बिजनेस हब बन चुका है. यहां मुख्य बाजार और रोड के किनारे की जमीनों की कीमत 40 से 50 लाख रुपये प्रति कट्ठा तक पहुंच चुकी है. अगर आम इलाकों की बात करें, तो वहां भी जमीन के दाम 4 से 5 लाख रुपये प्रति कट्ठा से कम नहीं हैं. सहजौली मौजा शाहपुर नगर पंचायत से बिल्कुल सटा हुआ है, इसलिए यहां भी बेहतर सड़कों और शहर के विस्तार के कारण जमीन के रेट लगातार बढ़ रहे हैं.

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झौवां मौजा में भी करोड़ों का कारोबार

झौवां मौजा के पास स्थित बेलवनिया और बरजा मोड़ जैसे बाजारों में हर दिन करोड़ों रुपये का बिजनेस होता है. कमर्शियल एक्टिविटी बढ़ने से यहां जमीनों की खरीद-बिक्री बहुत तेज हो गई है. अधिकारियों का मानना है कि इस नए फोटो वाले नियम से असली जमीन की पहचान हो सकेगी. इससे विवादित जमीनों की बिक्री पर रोक लगेगी और बिचौलियों या फर्जी कागजातों के जरिए होने वाली धोखाधड़ी पूरी तरह खत्म हो जाएगी. अब इन इलाकों में जमीन खरीदना और बेचना पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हो जाएगा.

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