Bihar Land Registry: रैयतों के लिए जरूरी खबर, जमीन रजिस्ट्री का बदलेगा नियम, कैसे तय होगा सर्किल रेट?

Bihar Land Registry: बिहार में जमीन रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सभी जिलों में भूमि वर्गीकरण पंजी बनाई जाएगी. जमीन की नई श्रेणियों के आधार पर सर्किल रेट तय होंगे. पटना मेट्रो क्षेत्र में हर साल और अन्य जिलों में तीन साल पर समीक्षा होगी. पढे़ं पूरी खबर…

By Aniket Kumar | June 20, 2026 9:25 AM

Bihar Land Registry: बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री और निबंधन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य के सभी जिलों में अलग से भूमि वर्गीकरण पंजी (Land Classification Register) तैयार की जाएगी. इसके लिए अंचल स्तर पर सर्वे कराया जाएगा और जमीन की वास्तविक श्रेणी तय की जाएगी. निबंधन विभाग ने इस कार्य की जिम्मेदारी जिला पदाधिकारियों और अंचल अधिकारियों को सौंपी है.

हर तीन साल पर होगी समीक्षा

भूमि सर्वे पर बैठक करते अधिकारी, फोटो- एआई जेनरेटेड

निबंधन महानिरीक्षक की ओर से जारी आदेश के अनुसार, भूमि वर्गीकरण पंजी की समीक्षा प्रत्येक तीन वर्ष पर की जाएगी. इस दौरान यह आकलन होगा कि किसी इलाके में विकास कार्यों के कारण जमीन की प्रकृति या उपयोग में बदलाव तो नहीं आया है. यदि किसी क्षेत्र की श्रेणी बदलती है तो सर्वे के आधार पर पंजी में संशोधन किया जाएगा.

पटना मेट्रो क्षेत्र में हर साल होगा सर्वे

पटना मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में तेजी से हो रहे शहरी विकास को देखते हुए यहां भूमि वर्गीकरण पंजी का अपडेट हर वर्ष किया जाएगा. विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह पंजी केवल निबंधन विभाग की जरूरतों के लिए होगी और इसे खेसरा पंजी नहीं माना जाएगा.

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चार क्षेत्रों में बांटी गई जमीन

राज्य सरकार ने पूरे बिहार में जमीन की एक समान श्रेणियां तय की हैं. इसके तहत भूमि को चार क्षेत्रों में विभाजित किया गया है-

  1. शहरी क्षेत्र
  2. ग्रामीण क्षेत्र
  3. मेट्रोपोलिटन क्षेत्र
  4. पेरिफेरल (शहर से सटे) क्षेत्र

ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की सात श्रेणियां तय की गई हैं, जबकि शहरी और पटना मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में छह श्रेणियां निर्धारित की गई हैं.

पेरिफेरल क्षेत्र का सर्किल रेट होगा अलग

शहर से सटे पेरिफेरल क्षेत्रों में भूमि का वर्गीकरण ग्रामीण क्षेत्र की तरह सात श्रेणियों में होगा. हालांकि यहां की जमीन का सर्किल रेट गांवों से अधिक और शहरों से कम रखा जाएगा. इसकी दर जिला मूल्यांकन समिति तय करेगी. विभागीय योजना के अनुसार अगला व्यापक सर्वे वर्ष 2029 में किया जाएगा.

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ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की 7 श्रेणियां

  1. व्यावसायिक भूमि
  2. औद्योगिक भूमि
  3. आवासीय भूमि
  4. मुख्य सड़क या हाईवे के दोनों ओर की भूमि
  5. सिंचित भूमि
  6. असिंचित भूमि
  7. बलुआही, पथरीली, दियारा एवं चंवर भूमि

शहरी क्षेत्र में जमीन की 6 श्रेणियां

  1. प्रधान सड़क व्यावसायिक/आवासीय भूमि
  2. मुख्य सड़क व्यावसायिक/आवासीय भूमि
  3. औद्योगिक भूमि
  4. शाखा सड़क व्यावसायिक/आवासीय भूमि
  5. अन्य सड़क या गली की आवासीय भूमि
  6. कृषि एवं गैर-आवासीय भूमि

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