Raxaul Haldia Expressway Project: बिहार के इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे परियोजना पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. इस मेगा प्रोजेक्ट से बिहार के कई जिलों को सीधा फायदा होने वाला है. खासकर बेगूसराय के शाम्हो दियारा क्षेत्र के लोगों के लिए दशकों पुराना इंतजार अब खत्म होने की उम्मीद जगी है. गंगा नदी पर बनने वाले प्रस्तावित पुल के साथ शाम्हो को जिला मुख्यालय से जोड़ने के लिए एक अलग एप्रोच रोड बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है.
जमीन का ब्योरा जुटाने में लगा प्रशासन
इस बड़े प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए शाम्हो सर्किल ऑफिस को एक पत्र भेजा गया है. इसमें प्रस्तावित पुल और एप्रोच रोड के दायरे में आने वाली जमीनों का पूरा ब्योरा मांगा गया है. इसके बाद सर्किल ऑफिस ने संबंधित गांवों की सरकारी या निजी जमीन और उसके मालिकाना हक का विवरण जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.इससे भूमि अधिग्रहण का काम समय पर पूरा हो सकेगा.
गंगा और क्यूल नदी पर बनेगा लंबा पुल
यह एक्सप्रेसवे बेगूसराय में एनएच-31 को भैरवार-सुरदासा ढाला के पास पार करेगा. इसके बाद गंगा और क्यूल नदी पर एक लंबा पुल बनाया जाएगा, जो आगे जाकर सूर्यगढ़ा-मुंगेर रूट (NH-80) को नदौरा और अवगिल गांवों के बीच जोड़ेगा.
इसी गंगा पुल से शाम्हो के लिए एक अलग एप्रोच सड़क निकाली जाएगी जो अकहा-कुरहा गांव के पूर्वी हिस्से तक जाएगी. इसके अलावा मटिहानी प्रखंड के नया गांव स्थित सार्वजनिक दुर्गा स्थान के पास भी एक एप्रोच रोड बनाने का प्रस्ताव है.
जिला मुख्यालय आना-जाना होगा बेहद आसान
अगर यह योजना तय समय में पूरी होती है, तो शाम्हो दियारा के लोगों को बांध वाली सड़क और मटिहानी ढाला के रास्ते सीधे बेगूसराय जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए एक बेहतरीन रास्ता मिल जाएगा. इससे इलाके के लोगों का सफर बेहद आसान हो जाएगा और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा.
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Raxaul Haldia Expressway Project: 60 हजार करोड़ की भारी-भरकम लागत और रूट
लगभग 719 किलोमीटर लंबा यह रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे एक बड़ा प्रोजेक्ट है. इसकी अनुमानित लागत करीब 60 हजार करोड़ रुपये है. यह एक्सप्रेस-वे देश के छह राज्यों से होकर गुजरेगा, जिसमें बिहार में गंगा नदी पर बनने वाला पुल इसका सबसे मुख्य हिस्सा माना जा रहा है.
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी दे दी है. इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य साल 2028 रखा गया है, लेकिन इसके विशाल आकार और जमीन अधिग्रहण की पेचीदा प्रक्रिया को देखते हुए निर्माण का समय थोड़ा बढ़ भी सकता है. अंतिम रूट बेगूसराय-शाम्हो-सूर्यगढ़ा होगा या बेगूसराय से सीधे सूर्यगढ़ा के बीच, इसका अंतिम फैसला तकनीकी परिस्थितियों को देखकर लिया जाएगा.
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