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Home Rajya बिहार बिहार दिवस 2026: पटना में सजेगी सुरों की महफिल, शान और सोना मोहापात्रा की धुनों पर झूमेगा गांधी मैदान

बिहार दिवस 2026: पटना में सजेगी सुरों की महफिल, शान और सोना मोहापात्रा की धुनों पर झूमेगा गांधी मैदान

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बिहार दिवस 2026: पटना में सजेगी सुरों की महफिल, शान और सोना मोहापात्रा की धुनों पर झूमेगा गांधी मैदान
सांकेतिक तस्वीर

Bihar Diwas 2026: बिहार दिवस 2026 के मौके पर पटना एक बार फिर सांस्कृतिक रंगों में रंगने जा रहा है. 22 से 24 मार्च तक गांधी मैदान, प्रेमचंद रंगशाला और रवीन्द्र भवन में तीन दिवसीय भव्य सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन होगा.

इस दौरान 69 कलाकार और संस्थाएं लोकगीत, शास्त्रीय संगीत, नृत्य और नाटक के जरिए बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करेंगी.

गांधी मैदान बनेगा सांस्कृतिक केंद्र

बिहार दिवस 2026 के शुभ अवसर पर राजधानी पटना कला और संस्कृति के एक अद्भुत महाकुंभ की गवाह बनने जा रही है. आगामी 22, 23 और 24 मार्च को आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय भव्य उत्सव के लिए गांधी मैदान, प्रेमचंद रंगशाला और रवीन्द्र भवन को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है.

इस बार जिला प्रशासन और संस्कृति विभाग ने स्थानीय प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय मंच प्रदान करने का संकल्प लिया है, जिसमें लोकगीत, शास्त्रीय संगीत, और रंगमंच का अनोखा संगम देखने को मिलेगा.

लोकगायकों का जलवा और शास्त्रीय गायन की गूंज

उत्सव के पहले दिन यानी 22 मार्च को सुबह 10:00 बजे से ही गांधी मैदान का माहौल भक्ति और उत्साह से भर जाएगा. कार्यक्रम का आगाज शनिष यादव और नवल किशोर शर्मा के ओजपूर्ण लोकगायन के साथ होगा. दोपहर की कड़कती धूप में सुनिधि सुमन, पूजा उपाध्याय और डॉ. निशा परासर के मधुर लोकगीत दर्शकों को शीतलता का अहसास कराएंगे.

शाम ढलते ही डॉ. अमृता का शास्त्रीय गायन फिजाओं में मिश्री घोलेगा, जबकि सबेरा कला केंद्र के कलाकार सामूहिक लोकनृत्य से मंच पर ऊर्जा भर देंगे. इसी दिन विभिन्न सामाजिक संदेशों के साथ नाटकों का मंचन भी किया जाएगा, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देंगे.

शास्त्रीय नृत्य और मैथिली संस्कृति का संगम

23 मार्च को कार्यक्रम का दूसरा पड़ाव रंगनाद समूह के लोकगायन से शुरू होगा, जिसके बाद शास्त्रीय नृत्य की एक शानदार श्रृंखला दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देगी. वहीं, उत्सव के समापन यानी 24 मार्च को डॉ. पूनम सिन्हा और अवधेश कुमार के स्वरों के साथ सभा का शुभारंभ होगा.

इस अंतिम दिन की विशेष आकर्षण मैथिली संस्कृति की वह अनूठी झलक होगी, जो बिहार की भाषाई विविधता और मिठास को प्रदर्शित करती है. तीन दिनों के भीतर कुल 69 स्थानीय कलाकार और संस्थाएं अपनी कला का प्रदर्शन कर यह साबित करेंगे कि बिहार की कला आज भी अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़ी हुई है.

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