‘दलित नक्सली और फॉरवर्ड शहीद’, भरत तिवारी एनकाउंटर पर RJD विधायक भाई वीरेंद्र के बयान से सियासी बवाल

Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर जिले में भरत तिवारी के एनकाउंटर मामले में सियासी पारा चढ़ गया है. एक तरफ जांच प्रक्रिया जारी है जबकि दूसरी तरफ बयानबाजी जमकर की जा रही है. इस बीच आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने सवाल उठाते हुए कहा, दलित का एनकाउंटर होता है तो उसे नक्सलवाद से जोड़ा जाता है जबकि सवर्ण का एनकाउंटर हुआ तो शहीद क्यों.

By Preeti Dayal | June 26, 2026 7:51 AM

Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भरत तिवारी का एनकाउंटर किया गया. इसे लेकर आम लोगों के साथ-साथ सियासत में भी बवाल देखा जा रहा है. इस घटना को लेकर पुलिसकर्मियों पर कई आरोप लगाए जा रहे हैं. सत्ता पक्ष के नेता तो बयानबाजी कर ही रहे हैं लेकिन दूसरी तरफ विपक्ष भी कई सवाल उठा रही है. इस बीच राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने मामले में बड़ा बयान दिया.

विधायक भाई वीरेंद्र ने लगाया ये आरोप

विधायक भाई वीरेंद्र ने इस एनकाउंटर के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है. उन्होंने कहा, अब तक हुए कई एनकाउंटर को लेकर सवाल उठे हैं और उन सभी मामलों में न्यायिक जांच होनी चाहिए. इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग समुदाय के लोगों के एनकाउंटर को अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है. यह कतई उचित नहीं है.

अलग-अलग समुदाय के लोगों के एनकाउंटर पर बोले

आगे भाई वीरेंद्र ने यह भी कहा कि जब भी किसी दलित का अगर एनकाउंटर किया जाता है तो उसे नक्सलवाद से जोड़ा जाता है. साथ ही अगर किसी अल्पसंख्यक का भी एनकाउंटर किया जाता है तो उसे आतंकवाद से जोड़ा जाता है. लेकिन जब किसी सवर्ण समुदाय के व्यक्ति का एनकाउंटर किया जाता है तो उसे शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग उठने लगती है. इस तरह की दोहरी नीति नहीं अपनाई जा सकती है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

इस वजह से भरत को शहीद का दर्जा दिए जाने की हुई मांग

दूसरी तरफ, भरत तिवारी के एनकाउंटर मामले में उसके पिता और भाई पर एफआईआर दर्ज किया गया था, जो वापस ले लिया गया है. इस तरह से उन्हें राहत मिली है. भरत तिवारी का एनकाउंटर फर्जी तरीके से किए जाने की बात उसके परिजन और ग्रामीण लगातार कह रहे थे.

उनका कहना है कि भरत बाढ़ पीड़ित लोगों की मदद कर रहे थे. जवइनिया गांव के बाढ़ पीड़ितों को विस्थापित करने की मांग वे लगातार प्रशासन से कर रहे थे और आवाज उठा रहे थे. लेकिन पुलिस ने उसका एनकाउंटर कर दिया. ऐसे में लोगों की मदद करते ही भरत को अपनी जान गंवानी पड़ी, इसलिए लोग उन्हें शहीद का दर्जा दे रहे हैं. इसके साथ ही लोगों ने जिस जगह पर बाढ़ पीड़ितों को बसाया जा रहा है, उसका नाम ‘भरत तिवारी नगर’ रखने की अपील की.

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