[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home बिहार भागलपुर थैलेसीमिया से पीड़ित 173 बच्चे खून की कमी के शिकार

थैलेसीमिया से पीड़ित 173 बच्चे खून की कमी के शिकार

0
थैलेसीमिया से पीड़ित 173 बच्चे खून की कमी के शिकार

विश्व थैलेसीमिया दिवस आज

– मायागंज अस्पताल के थैलेसीमिया डे केयर सेंटर में रोज पहुंचते हैं इलाज कराने औसतन 10 बच्चे

वरीय संवाददाता, भागलपुर

मायागंज अस्पताल जेएलएनएमसीएच में इस समय खून की कमी से पीड़ित व थैलेसीमिया बीमारी से ग्रसित 173 बच्चाें का इलाज चल रहा है. अस्पताल प्रबंधन की ओर से इन बीमार बच्चों को हर माह दो बार नि:शुल्क खून चढ़ाया जा रहा है. रक्त विकार से जुड़ी जन्मजात बीमारी थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों का इलाज अस्पताल के डे केयर सेंटर में किया जा रहा है. बच्चों के इलाज की व्यवस्था शिशु रोग विभाग के एचओडी डॉ केके सिन्हा व डॉ अंकुर प्रियदर्शी समेत अन्य चिकित्सक देख रहे हैं. मामले पर डॉ केके सिन्हा ने कहा कि भागलपुर समेत पूर्व बिहार, कोसी व छोटानागपुर इलाके में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों की भरमार है. इस समय हमारे अस्पताल में 173 बच्चाें का इलाज चल रहा है. हर बच्चों का थैलेसीमिया कार्ड भी बनाया गया है. इस कार्ड के सहारे मरीज देशभर के किसी भी शहर में इलाज करा सकते हैं. उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया बीमारी बच्चों में अपने माता-पिता से जेनेटिक रूप से ट्रांसफर होते हैं. विभाग के डॉ कृष्ण मुरारी ने कहा कि इसका मुख्य इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट है. यह इलाज काफी महंगा है. इसमें 30 से 40 लाख रुपये खर्च आता है. ऐसे में थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों के लिए खून चढ़ाना सुविधाजनक प्रक्रिया है.

खून में हीमोग्लोबिन की कमी बनी रहती है : शिशुरोग विभाग के एचओडी डॉ केके सिन्हा ने बताया कि थैलेसीमिया बीमारी के मरीजों के खून में हीमोग्लोबिन की कमी स्थायी रूप से बनी रहती है. खून के आरबीसी की आयु 120 दिन होती है. थैलेसीमिया मरीज में आरबीसी यानी लाल रक्त कण अधिकतम 80 दिनों तक जीवित रहता है. वहीं आरबीसी के निर्माण में सहायक आयरन के कण शरीर के अंदर किडनी, हार्ट, लीवर मं जमने लगते हैं. जैसे-जैसे मरीज की उम्र बढ़ती है, उसकी तकलीफ बढ़ती रहती है.

कैसे पहचाने थैलेसीमिया बीमारी को : खून की कमी से शरीर का पीला होना इसकी मुख्य पहचान है. शरीर के अंदर लीवर व तिल्ली फूलने लगती है. खून में हीमोग्लोबिन एफ की मात्रा बढ़ती है. शरीर की कार्यक्षमता घटती है. ऐसे लक्षण दिखने के बाद डॉक्टर से जांच करना चाहिए.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel