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bhagalpur news. आज पर्यावरण फ्रेंडली विज्ञान की जरूरत, जो करता है संपूर्ण विकास की बात

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आज एक साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है, ताकि हम विकसित भारत का निर्माण कर सकें. आज जरूरत है पर्यावरण फ्रेंडली विज्ञान की, जो समावेशी विकास की बात करता हो. रिसर्च स्कॉलरों का रिसर्च पेपर गुणवत्ता पूर्ण होना चाहिए. देश और समाज के उत्थान में उनकी भूमिका परिलक्षित होनी चाहिए. छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य करना होगा, ताकि वे भारत को 2047 तक विकसित भारत बनाने में अपनी अहम भूमिका निभा सके. यह बातें पूर्व कुलपति प्रो एके राय ने कही. मौका था टीएनबी कॉलेज व आइक्यूएसी द्वारा टीएफआरई ट्रस्ट, झारखंड के सहयोग से शुक्रवार को विज्ञान दिवस पर टीएनबी कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का. सेमिनार का विषय ””””विकसित भारत 2047 की ओर एक कदम”””” था. तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो विमलेंदु शेखर झा के निर्देशन में यह कार्यक्रम हुआ. उद्घाटन के बाद विश्वविद्यालय कुलगीत का गायन किया गया. सेमिनार सूवेनियर का लोकार्पण भी किया गया. हाइलाइट्स याद किये गये : महान वैज्ञानिक डॉ सीवी रमन के योगदान की गयी अपील : शोधार्थियों से गुणवत्तापूर्ण रिसर्च की बतायी गयी चुनौती : आजाद भारत में भारतीयों को नोबेल न मिलना रिसर्च से ही विकसित देशों की श्रेणी में खड़े हो सकते हैं हम : डॉ अशेष विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के सहायक प्राध्यापक व टर्टल फाउंडेशन के प्रतिनिधि डॉ अशेष आनंद ने कहा कि आज का युग प्रतिस्पर्धाओं का है. हमें अपने पड़ोसी देश चीन और अमेरिका से सीख लेने की आवश्यकता है. हमें रिसर्च कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए. रिसर्च के माध्यम से ही हम अपने देश को विकसित देशों की श्रेणी में खड़ा कर सकते हैं. वक्ताओं ने क्या कहा प्राचार्य डॉ दीपो महतो ने कहा कि शोध का बाजारीकरण चिंता का विषय है. शोध ऐसा होना चाहिए, जो समाज को नयी राह दिखाये और जिसमें नवीनता व संरचनात्मकता हो. संयोजक डॉ राजेश कुमार तिवारी ने कहा कि वैज्ञानिक तरक्की के माध्यम से ही हम 2047 तक विकसित भारत की परिकल्पना को साकार कर सकते हैं. प्रो आशीष कुमार ने कहा कि शोधार्थियों को ऐसे विषय चुनने चाहिए, जो समाज और देश का उत्थान करें. भौतिकी विभाग के डॉ पंकज कुमार ने कहा कि डॉ सीवी रमन के पदचिह्नों पर चलना ही विकास का मार्ग है. डॉ राजीव कुमार सिंह ने कहा कि आजाद भारत में भारतीयों को नोबेल न मिलना एक चुनौती है. उन्होंने ””””विज्ञान में महिलाएं”””” थीम पर चर्चा करते हुए इसरो वैज्ञानिक बिभा चौधरी के योगदान को रेखांकित किया. सचिव डॉ अनुराधा ने कहा कि वर्तमान समय में वैज्ञानिक नवाचारों का विस्तार बहुत आवश्यक है. बीएन कॉलेज के प्राचार्य डॉ अनिरुद्ध कुमार ने कहा कि विज्ञान को सामाजिक विज्ञान से जोड़ना समय की मांग है. आइक्यूएसी संयोजक डॉ अंशुमान सुमन ने धन्यवाद ज्ञापन किया. मंच संचालन डॉ निधि वर्मा व डॉ मीनू कुमारी ने किया.

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