मुख्य बातें:
सुलतानगंज, भागलपुर से शुभंकर की रिपोर्ट
Unique Fan Kanwar: सुलतानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल भरकर देवघर (झारखंड) स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले शिवभक्तों और डाक कांवरियों की कतारों के बीच सोमवार को आस्था का एक बेहद अनूठा और मनमोहक स्वरूप देखने को मिला. खगड़िया जिले के रहने वाले ‘सुधांशु बम’ नामक एक डाक कांवरिया अपनी अनोखी कांवड़ और अनूठी शिवभक्ति के कारण मार्ग में हजारों श्रद्धालुओं और राहगीरों के बीच आकर्षण का केंद्र बने रहे. उमस भरी भीषण गर्मी को देखते हुए सुधांशु इस बार बाबा भोलेनाथ को केवल गंगाजल ही नहीं, बल्कि उनके विश्राम के लिए हाथ से तैयार किया गया एक विशाल पंखा भी समर्पित करने की मन्नत लेकर पैदल रवाना हुए हैं.
कंधे पर 4 फीट ऊंचा तार का पंखा; तस्वीरें लेने के लिए रुक रहे राहगीर
- आकर्षण का केंद्र: सुधांशु बम अपने कंधे पर गंगाजल के कलश के साथ-साथ लोहे के तार और ताड़ के पत्तों से कलात्मक ढंग से निर्मित लगभग चार फीट ऊंचा एक विशेष पंखा (चंवर) लेकर चल रहे हैं.
- तस्वीरें लेने की होड़: कच्ची कांवरिया पथ और सुलतानगंज की सड़कों पर जैसे ही आम राहगीरों, स्थानीय दुकानदारों और साथी कांवड़ियों की नजर इस अद्भुत कांवड़ पर पड़ी, लोग अपनी यात्रा रोककर उन्हें निहारने लगे. कई लोग इस विहंगम दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों और सोशल मीडिया के लिए वीडियो में कैद करते दिखे.
“गर्मी में बाबा को झलूंगा पंखा” — हर पूर्णिमा को सुल्तानगंज आते हैं सुधांशु बम
वर्तमान में आसमान से बरसती आग और उमस भरी गर्मी से हर कोई बेहाल है. मेरे बाबा भी गर्भगृह में भक्तों की भारी भीड़ के बीच तपिश महसूस करते होंगे. इसी भावना के साथ मैं यह विशेष ४ फीट ऊंचा पंखा बाबा बैद्यनाथ की कपूर आरती और शृंगार के समय चंवर डुलाकर (पंखा झलकर) उनकी सेवा करने के लिए ले जा रहा हूं. मेरी यह साधना किसी दिखावे के लिए नहीं है; मैं साल की प्रत्येक पूर्णिमा तिथि पर अलग-अलग स्वरूपों में बाबा की विशेष भक्ति करते हुए सुलतानगंज से देवघर तक की कठिन पैदल यात्रा को दंडवत या डाक बम के रूप में पूरा करता हूं.
Unique Fan Kanwar: ‘बोल बम’ के जयघोष से गूंजा कांवरिया पथ
यद्यपि विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 का आधिकारिक शुभारंभ आगामी 30 जुलाई से होना सुनिश्चित हुआ है, लेकिन उससे काफी पहले से ही बिहार, झारखंड, बंगाल और नेपाल के शिवभक्तों का सुलतानगंज पहुंचना जारी है.
विशेष रूप से हर महीने पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि पर हजारों की संख्या में ‘डाक कांवरिया’ (जो 24 घंटे के भीतर बिना रुके 105 किलोमीटर की दूरी दौड़कर तय करते हैं) उत्तरवाहिनी गंगा से जल उठाने सुलतानगंज पहुंचते हैं. सोमवार को भी सुधांशु बम की इस अनोखी कांवर यात्रा के साथ-साथ पूरा मेला क्षेत्र और कांवरिया पथ ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान रहा, जिससे संपूर्ण इलाका पूरी तरह शिवमय नजर आया.
