भागलपुर से आरफीन जुबैर की रिपोर्ट
TMBU PhD Rule: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) ने पीएचडी उपाधि प्रदान करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है. अब शोधगंगा पोर्टल पर शोधप्रबंध अपलोड किए बिना किसी भी शोधार्थी को पीएचडी की डिग्री नहीं मिलेगी. विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि शोधगंगा अपलोड प्रमाणपत्र के अभाव में पीएचडी पुरस्कार से जुड़ी फाइल आगे नहीं बढ़ाई जाएगी.
पीएचडी प्रक्रिया में टीएमबीयू की बड़ी सख्ती
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी पीजी विभागाध्यक्षों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि पीएचडी मौखिक परीक्षा पूरी होने के सात दिनों के भीतर शोधार्थी को अपने शोधप्रबंध की एक हार्ड कॉपी और एक सॉफ्ट कॉपी केंद्रीय पुस्तकालय में जमा करनी होगी. इसके बाद शोधप्रबंध को शोधगंगा रिपॉजिटरी पर अपलोड किया जाएगा.
बिना प्रमाणपत्र आगे नहीं बढ़ेगी पीएचडी फाइल
नए निर्देश के अनुसार केंद्रीय पुस्तकालय की ओर से शोधगंगा पर थीसिस अपलोड किए जाने के बाद जो प्रमाणपत्र जारी होगा, उसे पीएचडी फाइल के साथ अनिवार्य रूप से संलग्न करना होगा. विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि बिना इस प्रमाणपत्र के किसी भी शोधार्थी की पीएचडी उपाधि प्रदान करने की प्रक्रिया पूरी नहीं की जाएगी.
TMBU PhD Rule: विभागाध्यक्षों की भी बढ़ी जिम्मेदारी
विश्वविद्यालय ने विभागाध्यक्षों को भी जवाबदेह बनाया है. उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि शोधगंगा अपलोड प्रमाणपत्र पीएचडी फाइल के साथ संलग्न हो. इसके बाद ही संबंधित फाइल विश्वविद्यालय स्तर पर आगे बढ़ सकेगी.
पारदर्शिता और गुणवत्ता बढ़ाने की पहल
दरअसल, लंबे समय से विश्वविद्यालयों में शोध कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं. ऐसे में यूजीसी विनियमों और कुलाधिपति के निर्देश के आलोक में टीएमबीयू ने यह सख्त कदम उठाया है. विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे शोध कार्यों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और शोध की गुणवत्ता की निगरानी भी आसान होगी.
क्या है शोधगंगा और क्यों है यह जरूरी?
शोधगंगा भारत सरकार के तहत संचालित एक राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी है, जहां देशभर के विश्वविद्यालयों की पीएचडी थीसिस डिजिटल स्वरूप में संग्रहित की जाती हैं. इसका उद्देश्य शोध कार्यों को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना, अकादमिक पारदर्शिता बढ़ाना और एक ही विषय पर अनावश्यक दोहराव को रोकना है.
शोधगंगा पर अपलोड होने के बाद शोधार्थियों के शोध देश-विदेश के शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए संदर्भ सामग्री के रूप में उपलब्ध हो जाते हैं.
