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Home बिहार भागलपुर शरत बाबू के जीवन को कैमरे में कैद करेंगे राजा सेन, भागलपुर से जुटा रहे ऐतिहासिक दस्तावेज

शरत बाबू के जीवन को कैमरे में कैद करेंगे राजा सेन, भागलपुर से जुटा रहे ऐतिहासिक दस्तावेज

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शरत बाबू के जीवन को कैमरे में कैद करेंगे राजा सेन, भागलपुर से जुटा रहे ऐतिहासिक दस्तावेज
बंगीय साहित्य परिषद् में शरद बाबू से संबंधित किताब का अवलोकन करते निर्देशक राजा सेन

भागलपुर से दीपक राव की रिपोर्ट

Sharat Chandra Documentary by Raja Sen: महान साहित्यकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के जीवन और साहित्यिक यात्रा को पर्दे पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है. पश्चिम बंगाल के जाधवपुर निवासी और तीन बार राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात फिल्म निर्देशक राजा सेन शरतचंद्र की जीवनी पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री का निर्माण करेंगे. इसी सिलसिले में वह भागलपुर पहुंचे, जहां उन्होंने शरतचंद्र के बचपन और जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कर ऐतिहासिक दस्तावेज, स्मृतियां और अन्य सामग्री संकलित की.

राजा सेन ने शरतचंद्र के ननिहाल, विद्यालय, गंगा तट और साहित्यिक संस्थानों का दौरा कर उनके जीवन से जुड़े तथ्यों को करीब से समझने का प्रयास किया. उन्होंने बताया कि डॉक्यूमेंट्री का उद्देश्य नई पीढ़ी को शरतचंद्र के व्यक्तित्व, संघर्ष और साहित्यिक योगदान से परिचित कराना है.

शरतचंद्र से जुड़े स्थलों का किया विस्तृत अध्ययन

भागलपुर प्रवास के दौरान राजा सेन सबसे पहले शरतचंद्र के बचपन के विद्यालय दुर्गाचरण प्राइमरी स्कूल पहुंचे. इसके बाद उन्होंने शरतचंद्र के ननिहाल गांगुलीबाड़ी का भ्रमण किया, जहां उनके परिजनों समुज्जवल गांगुली और शांतनु गांगुली से मुलाकात कर महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाईं.

इस दौरान उन्होंने शरतचंद्र से जुड़ी कई ऐतिहासिक वस्तुओं और स्मृतियों का भी दस्तावेजीकरण किया, जिनमें कलमदानी, हुक्कादानी, कुर्सी, पुरानी तस्वीरें तथा मां जगधात्री के पूजा स्थल की तस्वीरें शामिल हैं.

गंगा तट और बंगीय साहित्य परिषद में भी जुटाई सामग्री

निर्देशक राजा सेन ने उस गंगा कछार का भी अवलोकन किया, जहां शरतचंद्र चट्टोपाध्याय टहलते थे और मछली पकड़ने जाया करते थे. इसके अलावा उन्होंने टीएनबी कॉलेजिएट स्कूल का भ्रमण किया तथा अंत में बंगीय साहित्य परिषद पहुंचकर शरतचंद्र से संबंधित साहित्य और दुर्लभ दस्तावेजों का अध्ययन किया.

इस दौरान उन्हें परिषद के सचिव अंजन भट्टाचार्य, डॉ. अशोक सरकार, डॉ. शर्मीला बागची और सुजय सर्वाधिकारी सहित अन्य साहित्य प्रेमियों का सहयोग मिला. उन्होंने मशहूर साहित्यकार विष्णु प्रभाकर द्वारा लिखित ‘आवारा मसीहा’ सहित कई महत्वपूर्ण पुस्तकों और संदर्भों का भी अध्ययन किया.

‘डॉक्यूमेंट्री आज के दौर की सबसे प्रभावी विधा’

राजा सेन ने कहा कि डिजिटल और तेज रफ्तार जीवनशैली के इस दौर में लोगों के पास लंबी फिल्में देखने का समय कम होता जा रहा है. ऐसे में कम समय में अधिक जानकारी और प्रभावशाली प्रस्तुति देने वाली डॉक्यूमेंट्री फिल्मों की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है.

उन्होंने कहा कि डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से इतिहास, संस्कृति, साहित्य और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है.

कौन हैं राजा सेन

राजा सेन पश्चिम बंगाल के जाधवपुर के निवासी और बांग्ला फिल्म जगत के प्रतिष्ठित निर्देशक हैं. उन्होंने दूरदर्शन के लिए हिंदी धारावाहिक ‘अंजुमान’ और बांग्ला धारावाहिक ‘संपर्क’ का निर्देशन किया है.

उन्हें अब तक तीन बार राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.

  1. फिल्म ‘दामू’ के लिए सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का राष्ट्रपति पुरस्कार.
  2. फिल्म ‘आत्मीय स्वजन’ के लिए सर्वश्रेष्ठ पारिवारिक फिल्म का राष्ट्रपति पुरस्कार.
  3. प्रख्यात गायिका सुचित्रा मित्रा की जीवनी पर आधारित डॉक्यूमेंट्री के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार.

अब तक वह 14 फीचर फिल्में, कई टेलीफिल्म, डॉक्यूमेंट्री और टेलीविजन धारावाहिकों का निर्देशन कर चुके हैं.

मुख्य बिंदु

  1. राजा सेन शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी पर डॉक्यूमेंट्री बनाएंगे.
  2. शोध के लिए भागलपुर पहुंचकर शरतचंद्र से जुड़े स्थलों का भ्रमण किया.
  3. ननिहाल, विद्यालय, गंगा तट और बंगीय साहित्य परिषद से दस्तावेज और सामग्री जुटाई.
  4. शरतचंद्र की स्मृतियों से जुड़ी दुर्लभ वस्तुओं का भी दस्तावेजीकरण किया.
  5. नई पीढ़ी तक साहित्य और इतिहास पहुंचाने को बताया डॉक्यूमेंट्री का उद्देश्य.
  6. राजा सेन तीन बार राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित फिल्म निर्देशक हैं.

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