[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home बिहार भागलपुर bhagalpur news. संवाद आगे बढ़ता गया और बाहर आता गया मेहरा के जीवन का सच

bhagalpur news. संवाद आगे बढ़ता गया और बाहर आता गया मेहरा के जीवन का सच

0

संबंध की ओर से टाउन हाॅल में रांग टर्न नाटक का मंचन, दर्शकों से भरा रहा प्रशाल

ज्याें-ज्यों संवाद आगे बढ़ता गया, त्यों-त्यों मेहरा के जीवन का सच बाहर आता गया. नाटक की कहानी एक सफल व्यवसायी अरुण मेहरा के इर्द-गिर्द घूमती है. शुरुआत में एक साधारण-सा खेल प्रतीत होने वाला मुकदमा धीरे-धीरे एक गंभीर और रहस्यमय रूप ले लेता है. संबंध भागलपुर की ओर से शनिवार को टाउन हॉल में रांग टर्न नाटक का मंचन किया गया. सभागार दर्शकों से खचाखच भरा रहा. रंजीत कपूर द्वारा लिखित तथा रितेश रंजन द्वारा निर्देशित इस नाटक में दर्शक अंत तक बंधे रहे. इससे पहले कार्यक्रम का उद्घाटन राजीव कांत मिश्रा, भानु प्रताप सिंह, कौशल किशोर सिंह, अंशु सिंह, प्रो चंद्रेश, डॉ योगेंद्र ने संयुक्त रूप से किया. जैसे ही नाटक का आरंभ हुआ, मंच पर घटित होती घटनाओं ने धीरे-धीरे दर्शकों को एक गहन मनोवैज्ञानिक संसार में प्रवेश करा दिया. शहर के अनेक रंगकर्मी, कला प्रेमी एवं गण्यमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया.

इस नाटक में दर्शक स्वयं को एक ऐसे मनोवैज्ञानिक जाल में फंसा हुआ महसूस करते हैं, जहां सत्य, न्याय और नैतिकता की सीमाएं धुंधली होती चली जाती हैं. नाटक में जैदी की भूमिका में मिथिलेश कुमार ने अपने सशक्त अभिनय से गहरी छाप छोड़ी. माथुर के रूप में प्रणव कुमार सिन्हा ने संवाद अदायगी और भाव-भंगिमा के माध्यम से दर्शकों को प्रभावित किया. जोशी की भूमिका में निरुपम कांतिपाल, बन्ने मियां के रूप में संजीव कुमार दीपू, रघु के रूप में नितिन अनिमेष ने मंजी हुई भूमिका निभायी. मेहरा के पात्र में रितेश रंजन ने आंतरिक द्वंद्व और मानसिक संघर्ष को अत्यंत सूक्ष्मता से प्रस्तुत किया. नीना ओबेरॉय के रूप में दीक्षा का अभिनय भावपूर्ण रहा. शिवानी की भूमिका में आस्था ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का ध्यान खींचा. मेहरा की पत्नी की भूमिका लक्ष्मी कुमारी ने की. प्रकाश व्यवस्था विनय कुमार चौहान ने की. सेट डिजाइन प्रेम सागर एवं महानंद कुमार द्वारा तैयार किया गया. वस्त्र विन्यास एवं प्रॉपर्टी में अर्चना कुमारी एवं लक्ष्मी कुमारी का कार्य सराहनीय रहा.

यह नाट्य प्रस्तुति दिव्यांश कला केंद्र, रेलवे सांस्कृतिक कला मंच एवं संवर्धन के सहयोग से आयोजित की गयी. आयोजन में वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष राय, प्रवीर, डॉ मंजीत किनवार, डॉ चैतन्य प्रकाश, दीपक कुमार रंग, गौतम मल्लाह, तरुण घोष, देवाशीष बनर्जी, वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत, डॉ सुधीर मंडल, राहुल, ललन आदि उपस्थित थे.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel