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याद, याद, याद बस याद रह जाती है…

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याद, याद, याद बस याद रह जाती है…

याद, याद, याद बस याद रह जाती है…, हम तेरे शहर में आये हैं, मुसाफिर की तरह…जैसे गजल की प्रस्तुति सूफी गायक गजेंद्र मिश्रा एवं तबला गुरु अनुमेह मिश्रा की जुगलबंदी ने की. मौका था सोमवार को कला केंद्र परिसर में कला केंद्र पूर्ववर्ती छात्र संघ के तीन दिवसीय रंग कथा 2024 के समापन का. इससे पहले समापन समारोह का उद्घाटन मेयर डॉ बसुंधरालाल ने किया. द्वितीय रंग कथा 2024 का समापन तीसरे दिन की सांस्कृतिक संध्या और पुरस्कार वितरण समारोह के साथ हुआ. देशभर के कलाकारों के लिए एक यादगार क्षण साबित हुआ.

अतिथियों का स्वागत कला केंद्र के वरिष्ठ छात्र रंजन एवं सीए प्रदीप झुनझुनवाला ने किया. प्रदर्शनी में देशभर के कलाकारों की उत्कृष्ट कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया. इसके बाद पेंटिंग और मंजूषा कला में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया. वरिष्ठ चित्रकार अनिल कुमार सिंह की 200 मीटर से भी लंबा कैनवस पेंटिंग आकर्षण का केंद्र रहा. पेंटिंग प्रदर्शनी में कला केंद्र के पूर्ववर्ती छात्र-छात्राओं ने कला के कई स्वरूपों को चित्रित किया. अमृता सिंह, रूपम रानी, शालिनी सिन्हा ने अपनी कलाकृतियों में मल्टीमीडिया का प्रयोग करते हुए कहीं एब्स्ट्रेक्ट, प्राकृतिक दृश्य तो कहीं सुंदर फूलों की कृतियां द्वारा दर्शकों को खूब आकर्षित किया. वरिष्ठ छायाकार शशि शंकर के फोटो लोगों को आकर्षित कर रहे थे. डॉ इमराना रहमान ने एक्रिलिक रंग का प्रयोग कया था. वरिष्ठ चित्रकार विजय कुमार साह, अमन सागर, मृदुल सिंह, कृषिका, सविता पाठक, नंदिनी आदि ने लोक चित्रकला मंजूषा को प्रदर्शनी में लगाया. मधुबनी की कलाकार बबीता सिंह के चित्र प्रदर्शनी में लगाये गये थे. सरिता की नयी कविता संग्रह जिंदगी के सफर में का जिला परिषद उपाध्यक्ष प्रणव कुमार यादव, जीनी हमीदी, वरिष्ठ कथाकार रंजन, डॉक्टर रतन मंडल, प्रदीप झुनझुनवाला द्वारा विमोचन किया गया.

प्रदर्शनी में स्वराम लखन सिंह गुरुजी, नूतन कुमारी, डॉ सुधीर, सरिता सिंह, रूपम रानी, शशि शंकर, लता कुमारी, ज्योति सिन्हा, रितिका सिन्हा, मोनी कुमारी, नूतन, रितिका सिन्हा ने मंडला आर्ट, वीणा मिश्रा, जूही, अमन सागर, सविता पाठक आदि के चित्रों ने भी दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया. कार्यक्रम में सभी प्रतिभागी कलाकारों को चादर और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया.

समापन समारोह में अध्यक्ष डॉ सुधीर मंडल ने सभी का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि रंग कथा का यह आयोजन भागलपुर और देशभर के कलाकारों के लिए एक प्रेरणास्रोत है. इसे हर वर्ष और अधिक भव्य रूप में आयोजित करने का संकल्प लिया गया. रूपम दीने भी सभी कलाकारों का धन्यवाद ज्ञापन किया. इस मौके पर उदय, मनोज, डॉ चैतन्य प्रकाश, श्वेता शंकर, जयप्रकाश, अध्यक्ष डॉ सुधीर मंडल, सचिव शशिशंकर, कोषाध्यक्ष रूपम, राहुल, मृदुला सिंह, जय कुमार, पंकज मणि, देवाशीष, ज्योत्स्ना पांडेय आदि उपस्थित थे.

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आकर्षण का केंद्र रहा दिनकर पुस्तकालय का पुस्तक मेला

फोटो सिटी के बाहर

कला केंद्र में दिनकर पुस्तकालय का पुस्तक मेला आकर्षण का केंद्र रहा. इस दौर में जब साहित्य हाशिये पर धकेला जा रहा है, यह पुस्तक मेला अभिनव प्रयोग है. यहां नामचीन लेखकों की लगभग सभी नयी-पुरानी किताबें उपलब्ध थीं. सुखद यह था कि यहां आकर लोग पुस्तकों में दिलचस्पी दिखा रहे थे और खरीद रहे थे. इससे यह सिद्ध होता है कि अगर सुविधाएं हों तो हिंदी में अभी पाठक हैं और खरीद कर किताबें पढ़नेवाले पाठक हैं. दिनकर पुस्तकालय के संचालक व सहयोगी साथी मयंक झा, नयन झा व रोहित झा ने बताया कि दिनकर पुस्तकालय में हिंदी साहित्य व अन्य की खरीद के लिए शहर में बेहतर विकल्प है. दिलचस्पी रखनेवाले पाठक मानिक सरकार के पास दिनकर पुस्तकालय आकर किताबों की खोती जा रही दुनिया को समृद्ध कर सकते हैं. दिनकर पुस्तकालय की यह पहल सचमुच सुखद है, जब भागलपुर जैसे शहर में अच्छी साहित्यिक किताबों की सहजता से उपलब्धता मुश्किल हो गयी है. दिनकर पुस्तकालय का अगला पुस्तक मेला आठ से 10 जनवरी तक टीएमबीयू पीजी हिंदी विभाग में लगाया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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