[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home बिहार भागलपुर Bhagalpur news पुरुषोत्तम मास 17 से, मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम

Bhagalpur news पुरुषोत्तम मास 17 से, मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम

0

पुरुषोत्तम मास के आगमन के साथ ही क्षेत्र में मांगलिक कार्यों पर विराम लग जायेगा. अधिक मास की शुरुआत 17 मई से हो रही है, जो 15 जून तक चलेगा. इस दौरान डीजे बाजा, शहनाई, बारात, विवाह, गौना, तिलकोत्सव सभी शुभ कार्य स्थगित रहेंगे. 15 जून के बाद पुनः मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त प्राप्त होंगे. साहित्यवाचस्पति डॉ रामजी मिश्र रंजन ने बताया कि यह महीना भगवान विष्णु और उनके विभिन्न अवतारों की उपासना के लिए महत्वपूर्ण है. इस दौरान श्रद्धा भाव से दान, पूजा और साधना करने वाले भक्तों को भगवान श्री हरि की विशेष कृपा प्राप्त होती है. पूरे 30 दिनों तक भगवान नारायण का चिंतन, गीता पाठ और भक्ति करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती है. शास्त्रों में वर्णित है कि यदि ज्येष्ठ माह में मलमास पड़ता है, तो गंगा दशहरा का पर्व भी इसी मास की दशमी तिथि को मनाया जाता है. इस अवधि में जनेऊ, कर्णछेदन, गृह निर्माण की शुरुआत, गृह प्रवेश, व्यापार प्रारंभ और वाद्य कलारंभ जैसे कार्य नहीं किये जायेंगे. हालांकि नये वस्त्र, आभूषण, फ्लैट, मकान, टीवी, फ्रिज आदि की खरीदारी पर कोई रोक नहीं है. आवश्यक कार्य जिनका दूसरा अवसर नहीं मिलता, उन्हें किया जा सकता है.

…और इसे मलमास भी कहते हैं

धार्मिक मान्यता के अनुसार अधिकमास हर तीन वर्ष में आने वाला अतिरिक्त चंद्र मास है, जिसमें सूर्य की संक्रांति नहीं होती. इस कारण इसे मलमास कहा जाता है. यह मास सूर्य और चंद्र वर्ष के संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है, ताकि ऋतु, पर्व और व्रत समयानुसार संचालित हो सकें. पौराणिक कथा के अनुसार जब इस मास को अन्य महीनों ने मलिन कह उपेक्षित किया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने इसे अपना नाम ‘पुरुषोत्तम’ प्रदान किया. तभी से इसका महत्व बढ़ गया. मान्यता है कि इस मास में किया गया दान, पुण्य और कथा श्रवण सीधे भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित होता है और इसका अक्षय फल प्राप्त होता है. इस मास का मुख्य उद्देश्य भगवान के प्रति श्रद्धा बढ़ाना, आध्यात्मिक उन्नति करना और जीवन की बाधाओं से मुक्ति पाना है. ब्राह्मणों, साधुओं और जरूरतमंदों की सेवा को इस अवधि में सर्वोत्तम माना गया है.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel