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Home बिहार भागलपुर सुलतानगंज में शिक्षकों को मिली नई ट्रेनिंग, अब सरकारी स्कूलों में बदलेगा पढ़ाई का तरीका

सुलतानगंज में शिक्षकों को मिली नई ट्रेनिंग, अब सरकारी स्कूलों में बदलेगा पढ़ाई का तरीका

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सुलतानगंज में शिक्षकों को मिली नई ट्रेनिंग, अब सरकारी स्कूलों में बदलेगा पढ़ाई का तरीका

सुलतानगंज(भागलपुर) से शुंभाकर की रिपोर्ट

Mission Nipun Bihar: सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का तरीका तेजी से बदल रहा है. अब बच्चों को सिर्फ किताबें पढ़ाने के बजाय उन्हें सोचने, समझने, सवाल पूछने और मिलकर सीखने के लिए तैयार किया जाएगा. इसी बदलाव की दिशा में सुलतानगंज में मिशन निपुण बिहार के तहत ब्लॉक स्तरीय उन्मुखीकरण सह कार्यशाला आयोजित की गई, जहां प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के मेंटर शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया गया.

कृष्णानंद सूर्यमल इंटरस्तरीय मॉडल स्कूल में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप सरकारी विद्यालयों में सीखने का माहौल तैयार करना था, ताकि बच्चों की बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक क्षमता को मजबूत किया जा सके.

अब रटने से नहीं, समझने से होगी पढ़ाई

आज भी अधिकांश सरकारी विद्यालयों में रटकर पढ़ाई करने की प्रवृत्ति देखने को मिलती है. इसका असर बच्चों की समझ, अभिव्यक्ति और समस्या समाधान क्षमता पर पड़ता है. मिशन निपुण बिहार इसी चुनौती को बदलने की कोशिश कर रहा है.

कार्यशाला का उद्घाटन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तनु कुमारी ने किया. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तक पूरा कराना नहीं, बल्कि बच्चों में विश्लेषण क्षमता, संवाद कौशल, नेतृत्व, रचनात्मकता और व्यवहारिक ज्ञान विकसित करना है.

उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को उसकी सीखने की गति के अनुसार आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

क्या है पीयर लर्निंग, जिससे बदल सकती है कक्षा की तस्वीर

कार्यशाला में शिक्षकों को पीयर लर्निंग यानी सहपाठी शिक्षण मॉडल के बारे में विस्तार से बताया गया.

इस मॉडल में बच्चे केवल शिक्षक से ही नहीं, बल्कि अपने साथ पढ़ने वाले विद्यार्थियों से भी सीखते हैं. जब एक छात्र दूसरे छात्र को किसी विषय को समझाता है, तो दोनों की समझ बेहतर होती है.

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है, टीमवर्क की भावना विकसित होती है और कक्षा में सक्रिय भागीदारी भी बढ़ती है.

Mission Nipun Bihar: प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग से जुड़ेगी पढ़ाई और जिंदगी

प्रशिक्षण के दौरान प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग पर भी विशेष जोर दिया गया.

इस पद्धति में विज्ञान, गणित और भाषा जैसे विषयों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा जाएगा. बच्चों को स्थानीय संसाधनों, दैनिक जीवन की समस्याओं, प्रयोगों और गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा.

इससे उनमें तार्किक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित होगी.

पटना: बीएसएससी अभ्यर्थियों ने लंबित परीक्षाओं की तिथि जारी करने की मांग को लेकर आयोग कार्यालय में प्रदर्शन किया. 10-15 दिन में तारीख नहीं आने पर महाआंदोलन की चेतावनी दी.

शिक्षकों को दिए गए महत्वपूर्ण निर्देश

प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तनु कुमारी ने शिक्षकों से कहा कि वे प्रत्येक बच्चे के सीखने के स्तर का नियमित आकलन करें. जिन बच्चों को किसी विषय में कठिनाई हो रही है, उनके लिए सुधारात्मक शिक्षण की व्यवस्था की जाए.

उन्होंने यह भी कहा कि कक्षा का वातावरण ऐसा होना चाहिए, जहां हर बच्चा बिना झिझक अपनी बात रख सके और सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल हो.

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विशेषज्ञों ने बताए व्यवहारिक तरीके

कार्यशाला में इनवॉल्व लर्निंग सॉल्यूशन फाउंडेशन के जिला समन्वयक तनवीर अहमद, राहुल सिंह और प्रोग्राम लीड राम प्रकाश यादव ने मेंटर शिक्षकों को पीयर लर्निंग मॉडल, गतिविधि आधारित शिक्षण और माइक्रो इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट के व्यवहारिक पहलुओं की जानकारी दी.

प्रशिक्षकों ने बताया कि यदि इन पद्धतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो सरकारी विद्यालयों में “पढ़ो, समझो, करो और सीखो” की संस्कृति विकसित होगी.

मिशन निपुण बिहार को मिलेगी नई गति

कार्यशाला के अंत में शिक्षकों ने अपने-अपने विद्यालयों में पीयर लर्निंग और प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग को प्रभावी ढंग से लागू करने का संकल्प लिया. उन्होंने नई शिक्षण पद्धति को लेकर अपने अनुभव साझा किए और विद्यालय स्तर की कार्ययोजना भी प्रस्तुत की.

शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से सरकारी विद्यालयों में रटने की संस्कृति की जगह समझ आधारित, सहभागितापूर्ण और आनंददायक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा. इससे मिशन निपुण बिहार के तहत बच्चों की बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है.

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